फतहनगर - सनवाड

पालिका चुनाव: सर्वे को नजरअंदाज करने पर भाजपा कार्यकर्ताओं में उबाल

फतहनगर। फतहनगर-सनवाड़ नगर पालिका चुनाव में वार्ड संख्या 19 भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनता नजर आ रहा है। पार्टी के स्तर पर कराए गए सर्वे में जिस प्रत्याशी को मजबूत और जीत की स्थिति में माना जा रहा था, उसे कथित तौर पर नजरअंदाज किए जाने से भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नाराजगी का माहौल है। टिकट वितरण में सर्वे रिपोर्ट और स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय को तवज्जो नहीं दिए जाने को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।

वार्ड 19 को लंबे समय से भाजपा के लिए मजबूत और सुरक्षित वार्ड माना जाता रहा है। यहां पार्टी का संगठनात्मक आधार मजबूत होने के साथ ही भाजपा के परंपरागत मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि टिकट वितरण में जमीनी स्थिति, प्रत्याशी की लोकप्रियता, जनसंपर्क, सामाजिक स्वीकार्यता और सर्वे रिपोर्ट को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन टिकट चयन में जातिगत समीकरण को अधिक महत्व दिए जाने की चर्चा के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है।

जीताऊ चेहरे को दरकिनार करने का आरोप

स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वार्ड में पार्टी के लिए सबसे मजबूत माने जा रहे संभावित प्रत्याशी को दरकिनार कर दिया गया। कार्यकर्ताओं के अनुसार संबंधित प्रत्याशी लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय रहा है और आम मतदाताओं के बीच उसकी अच्छी पकड़ है। पार्टी के सर्वे में भी उसकी स्थिति मजबूत बताई गई थी। इसके बावजूद अंतिम समय में टिकट चयन के दौरान अन्य समीकरण हावी हो गए।

कार्यकर्ताओं का मानना है कि चुनाव में केवल जातिगत गणित के आधार पर प्रत्याशी का चयन करना पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। उनका कहना है कि वार्ड स्तर पर मतदाता प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, व्यवहार, सामाजिक संपर्क और क्षेत्र में उसकी सक्रियता को भी महत्व देते हैं।

कांग्रेस ने उतारा बाहरी प्रत्याशी

दूसरी ओर कांग्रेस ने वार्ड 19 से बाहरी प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। कांग्रेस प्रत्याशी को लेकर भी वार्ड में चर्चा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं का दावा है कि कांग्रेस का प्रत्याशी भाजपा के मजबूत आधार को चुनौती देने की स्थिति में फिलहाल कमजोर नजर आ रहा है। यदि भाजपा का मजबूत चेहरा मैदान में होता तो मुकाबला एकतरफा रहने की संभावना जताई जा रही थी।

हालांकि टिकट को लेकर भाजपा में पैदा हुआ असंतोष यदि मतदान तक कायम रहता है तो पार्टी के लिए समीकरण बदल सकते हैं। पार्टी के नाराज कार्यकर्ता और संभावित दावेदारों के समर्थक चुनाव में किस तरह की भूमिका निभाते हैं, यह परिणाम पर असर डाल सकता है।

कार्यकर्ताओं की नाराजगी बनी चुनौती

भाजपा कार्यकर्ताओं में सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर है कि टिकट वितरण में स्थानीय स्तर पर किए गए सर्वे और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव मैदान में पार्टी का झंडा और चुनाव चिह्न महत्वपूर्ण जरूर हैं, लेकिन वार्ड स्तर पर जीत के लिए प्रत्याशी का मजबूत होना भी उतना ही आवश्यक है।

पार्टी के अंदर चल रही इस नाराजगी को समय रहते दूर नहीं किया गया तो इसका सीधा असर चुनाव प्रचार और मतदान पर पड़ सकता है। अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती नाराज कार्यकर्ताओं को साथ लाने और प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट माहौल बनाने की होगी।

वार्ड 19 में बदल सकता है चुनावी गणित

फिलहाल वार्ड 19 में भाजपा के पक्ष में मजबूत संगठन और पारंपरिक मतदाता आधार दिखाई देता है, वहीं टिकट चयन को लेकर उपजा असंतोष पार्टी के लिए चिंता का कारण बन गया है। कांग्रेस ने बाहरी प्रत्याशी को मैदान में उतारकर भाजपा के लिए मुकाबले को आसान करने के बजाय स्थानीय स्तर पर उसे चुनौती देने की कोशिश की है।

राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि भाजपा नेतृत्व नाराज कार्यकर्ताओं को किस तरह मनाता है और पार्टी के भीतर पैदा हुए असंतोष को कितना नियंत्रित कर पाता है। यदि भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर नहीं हुई तो सुरक्षित माना जा रहा वार्ड 19 पार्टी के लिए अप्रत्याशित रूप से कठिन मुकाबले में बदल सकता है। वहीं यदि नेतृत्व समय रहते सभी गुटों को एकजुट करने में सफल रहता है तो भाजपा अपने परंपरागत आधार के दम पर स्थिति को फिर से मजबूत कर सकती है।

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