फतहनगर। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर फतहनगर स्थित अखाड़ा मंदिर में भगवान सत्यनारायण का अत्यंत भव्य, आकर्षक एवं मनमोहक श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु महिलाओं एवं पुरुषों का तांता लगा रहा। श्रद्धालु कलश, फल एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान सत्यनारायण से सुख-समृद्धि एवं मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते नजर आए।
मंदिर के महंत शिव शंकरदास महाराज के सान्निध्य में किए गए इस विशेष श्रृंगार में भक्ति, परंपरा और ऋतु विशेष के धार्मिक महत्व का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। मंदिर की संपूर्ण पृष्ठभूमि और भगवान के सिंहासन को चमकीले पीतांबर रंग के रेशमी वस्त्रों से सजाया गया। सुनहरी जरी और बारीक बूटियों से सुसज्जित ये वस्त्र भगवान विष्णु के प्रिय पीले रंग की छटा बिखेर रहे थे। पीले रंग की इस आभा ने पूरे मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया।
मुख्य वेदी पर भगवान विष्णु स्वरूप सत्यनारायण एवं माता लक्ष्मी के सुंदर विग्रह विराजमान थे। दोनों विग्रहों को स्वर्ण एवं रजत निर्मित कलात्मक मुकुटों से अलंकृत किया गया था। मुकुटों पर की गई बारीक नक्काशी और उनके पीछे बने आभामंडल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहे। भगवान को स्वर्णाभूषण, मोतियों की मालाएं तथा पीले गेंदे और लाल गुलाब के फूलों की सुगंधित मालाएं अर्पित की गईं, जिससे विग्रहों की शोभा और भी बढ़ गई।
निर्जला एकादशी ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में आने के कारण इस दिन जलदान एवं मौसमी फलों के अर्पण का विशेष महत्व माना जाता है। इसी परंपरा के अनुरूप भगवान के समक्ष ताजे, पके हुए पीले आमों का विशेष भोग सजाया गया। मुख्य वेदी के आगे एक बड़े पात्र में आमों को आकर्षक ढंग से रखा गया था, वहीं भगवान के समीप भी कई स्थानों पर आमों की सजावट की गई थी। यह दृश्य श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा था।
श्रृंगार में पुष्प सज्जा का भी विशेष महत्व रहा। भगवान के समक्ष तुलसी दल एवं पीले-सफेद पुष्पों से निर्मित सुंदर गोलाकार माला रखी गई, जो वैजयंती माला का आभास दे रही थी। सिंहासन के दोनों ओर नीले रंग के पुष्प गुलदस्तों की सजावट पीले रंग की पृष्ठभूमि के साथ अत्यंत मनोहारी प्रतीत हो रही थी। संगमरमर की वेदी पर बने मोरपंख के सुंदर चित्र एवं कलात्मक सजावट ने मंदिर की शोभा में चार चांद लगा दिए।
धार्मिक प्रतीकों में भगवान के दोनों ओर स्थापित चांदी की कामधेनु गायों की प्रतिमाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। बछड़े को दूध पिलाती हुई इन प्रतिमाओं को समृद्धि, सुख एवं कल्याण का प्रतीक माना जाता है। वहीं मंदिर परिसर में रखा जल से भरे घड़े का प्रतीकात्मक कलश, जिसके मुख को लाल पवित्र वस्त्र से ढका गया था, निर्जला एकादशी पर जलदान की महिमा का संदेश दे रहा था।
सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं मंदिर पहुंचकर कलश एवं फल अर्पित कर रही थीं। महिलाओं ने भगवान सत्यनारायण के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति, उत्तम स्वास्थ्य एवं समृद्धि की कामना की। दिनभर मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालुओं ने भगवान के इस अद्भुत और आलौकिक श्रृंगार का दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
निर्जला एकादशी के अवसर पर अखाड़ा मंदिर में सजा भगवान सत्यनारायण का यह दिव्य दरबार भक्ति, आध्यात्मिकता, ऋतु परंपरा और भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का जीवंत उदाहरण बन गया।

Leave a Reply