गुरु सान्निध्य ही जीवन निर्माण का आधार, बिना गुरु के आत्मबोध संभव नहीं — युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी
फतहनगर, 21 मई। गुरु अम्बेश मेमोरियल संस्थान पावनधाम, फतहनगर की बहुप्रतीक्षित विनती पर श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी, हितमित भाषी हितेंद्र ऋषिजी आदि ठाणा 4 का गुरुवार को भव्य शोभायात्रा एवं श्रद्धाभाव से ओतप्रोत मंगल प्रवेश हुआ। फतहनगर नगर गुरु भक्ति, धर्मभावना और जयघोषों से गूंज उठा, जब हजारों श्रावक- श्राविकाओं ने गुरु भगवंतों की अगवानी करते हुए गुरुभक्ति और समर्पण का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया।
गुरु अम्बेश मेमोरियल संस्थान पावनधाम के महामंत्री दिनेश सिंघवी ने जानकारी देते हुए बताया कि युवाचार्य भगवंत की भव्य विहार शोभायात्रा फतहनगर चौराहे से प्रारंभ हुई। शोभायात्रा बस स्टैंड, सदर बाजार मार्ग एवं जैन स्थानक से होती हुई पावनधाम पहुंची। मार्ग में स्थान-स्थान पर श्रद्धालुओं ने जयघोषों, वंदन-अभिनंदन एवं धर्ममय वातावरण के साथ गुरु भगवंतों का स्वागत किया गया ।पावनधाम पहुंचने पर संस्थान के प्रमुख प्रकाश सिंघवी, कोषाध्यक्ष दिनेश सिंघवी, गजेन्द्र चंडालिया, नितीन सेठिया सहित फतहनगर श्रीसंघ के संरक्षक दिनेश सांभर, अध्यक्ष कनकमल बाफना, सम्पतलाल बाफना एवं पदाधिकारियों ने गुरु भगवंतों का श्रद्धापूर्वक अभिनंदन किया।

इस अवसर पर गुरु अम्बेश, सौभाग्य एवं मदन परंपरा के मेवाड़ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे उपप्रवर्तक कोमल मुनिजी, उपप्रवर्तिनी विजयप्रभा महासती, विद्याश्री उपप्रवर्तिनी दिव्य ज्योति जी, महासती सुचेता जी, साध्वी महिमाश्री, साध्वी ऐष्णाश्री आदि साधु-साध्वीवृंद ने भी जयघोषों के साथ युवाचार्यश्री का वंदन-अभिनंदन किया।
इस अवसर पर आयोजित विशाल धर्मसभा मे युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी ने कहा कि गुरु का सान्निध्य केवल बाहरी निकटता नहीं, बल्कि आत्मजागरण का मार्ग है। जो गुरु के हाथ को थामकर चलता है, वही जीवन का वास्तविक प्रकाश प्राप्त करता है। गुरु के सान्निध्य में रहने वाला व्यक्ति आत्मा और परमात्मा के सत्य को समझने में समर्थ बनता है। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन का निर्माण संभव नहीं, क्योंकि गुरु ही जीवन को दिशा, दृष्टि और साधना का आधार प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान और सिद्धांतों को पढ़ लेने से आत्मबोध नहीं होता, बल्कि गुरु की अनुभूति और उनके मार्गदर्शन से ही जीवन में वास्तविक परिवर्तन आता है। पावनधाम में प्रवेश करते हुए यहां की दिव्यता और गुरु अम्बेश की अदृश्य आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव हुआ। यह स्थान केवल भवन नहीं, बल्कि साधना, श्रद्धा और आत्मिक ऊर्जा का केंद्र है।
युवाचार्यश्री ने सभी से गुरु परिवार एवं धर्मसंघ के प्रति समर्पण और एकता बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि महापुरुषों के आशीर्वाद और उनकी वाणी ही समाज की वास्तविक पूंजी है। हमारा यहां आना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य और गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि पावनधाम केवल वंदन का स्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, दर्शन और चारित्र की साधना का केंद्र है। केवल शरीर को नमन करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और तपमय जीवन को आत्मसात करना ही वास्तविक वंदना है।
युवाचार्यश्री ने गुरु अम्बेश स्मृति धाम को श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बताते हुए कहा कि यदि गुरुजनों का उपकार और प्रेरणा नहीं होती तो हम आज इस साधना पथ पर नहीं होते। हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी श्रद्धा, संस्कार और गुरु परंपरा की चेतना को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं। उन्होंने पावनधाम में प्रार्थना, जाप एवं माला फेरने की प्रेरणा देते हुए कहा कि गुरु भक्ति जीवन का स्थायी भाव बननी चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुरु परिवार से कभी दूर नहीं होना चाहिए। गुरु के प्रति कृतज्ञता, समर्पण और अपनत्व ही जीवन का वास्तविक निर्माण करते हैं।
इस अवसर पर उपप्रवर्तक कोमल मुनिजी ने युवाचार्यश्री के प्रति भावपूर्ण श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा, “मेरी भावना है कि मैं आपके चरणों में रहकर चातुर्मासकाल में धर्म, साधना और संयम के गूढ़ सूत्रों को निकट से सीखने का सौभाग्य प्राप्त करूं। आपके सान्निध्य में रहना केवल प्रवचन सुनने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने की साधना है। आपके चरणों में रहकर धर्म की सूक्ष्मता, संयम की गरिमा और साधना की वास्तविकता को समझने का अवसर प्राप्त हो जाए, यही मेरी भावना है।
मंगल प्रवेश एवं धर्मसभा में मेवाड़ भवन ट्रस्ट मुंबई के संरक्षक चतरलाल लोढ़ा, रोशनलाल बड़ाला, अध्यक्ष इन्द्रमल बड़ाला, विजय कोठारी, नरेन्द्र नवलखा, पथिक विहार धाम के अध्यक्ष मांगीलाल लोढ़ा, अम्बाशोध संस्थान के अध्यक्ष ललित लोढ़ा, धर्मज्योति परिषद के संरक्षक कंवरलाल सूरिया, प्रेमसज्जन संस्थान के अध्यक्ष सुरेश सूरिया, मेवाड़ युवक मंडल के बबलू रांका, जैन कॉन्फ्रेंस राजस्थान प्रांत के अध्यक्ष आनन्द चपलोत, कुमुद ज्ञानोदय ट्रस्ट के अध्यक्ष चौथमल सांखला, चंदनबाला महिला मंडल की शालिनी तातेड़ सहित भादसोड़ा, कांकरोली, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, सूरत, अहमदाबाद, गंगापुर एवं विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
इस दौरान उपस्थित संतों एवं साध्वीवृंद ने भी अपने प्रेरक विचार व्यक्त किए
कार्यक्रम के अंत में गुरु अम्बेश मेमोरियल संस्थान पावनधाम के प्रमुख प्रकाश सिंघवी ने सभी आगंतुक संत-साध्वीवृंद, अतिथियों, पदाधिकारियों एवं दूर-दराज से पधारे श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि युवाचार्यश्री एवं गुरु भगवंतों के मंगल प्रवेश से पावनधाम की पावनता और अधिक आलोकित हुई है।


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