फतहनगर - सनवाड

हाइब्रिड फार्मूला बना भाजपा के लिए गलफांस,13-12 के बहुमत में अपनों की बगावत ने बिगाड़ा भाजपा का गणित, कांग्रेस के समर्थन से मुकाबला रोचक, राजेश चपलोत की पत्नी ममता निर्दलीय मैदान में, सोमवार को होगा अध्यक्ष पद का फैसला

 

फतहनगर। फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका अध्यक्ष पद का चुनाव अब महज भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि यह चुनाव पार्टी के भीतर असंतोष, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरे परिवार और बदलते राजनीतिक समीकरणों का केंद्र बन गया है। निकाय चुनाव में 25 वार्डों में भाजपा ने 13 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। सामान्य तौर पर इस आंकड़े के बाद भाजपा का अध्यक्ष बनना आसान माना जा रहा था, लेकिन अध्यक्ष पद के लिए बदले समीकरणों ने पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। 

अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा ने सीमा सोनी को मैदान में उतारा। इसी बीच भाजपा पार्षद एवं पूर्व पालिका अध्यक्ष राजेश चपलोत की पत्नी ममता चपलोत ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। ममता स्वयं पार्षद का चुनाव नहीं लड़ी थीं, लेकिन राजस्थान में लागू हाइब्रिड व्यवस्था के तहत गैर-पार्षद व्यक्ति भी निकाय अध्यक्ष पद के चुनाव में प्रत्याशी बन सकता है। यही व्यवस्था अब फतहनगर-सनवाड़ में भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती के रूप में सामने आई है। 

 टिकट से शुरू हुआ विवाद, अध्यक्ष चुनाव तक पहुंची लड़ाई.

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि राजेश चपलोत ने वार्ड 3 से अपनी पत्नी के लिए भाजपा का टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बाद राजेश स्वयं वार्ड से चुनाव मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित होने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी ममता को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार दिया। ममता के नामांकन के साथ ही भाजपा के 13 पार्षदों का बहुमत कागज पर तो कायम रहा, लेकिन पार्टी के भीतर संभावित क्रॉस-वोटिंग और समर्थन को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। विभिन्न रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि राजेश चपलोत के साथ भाजपा के कुछ पार्षदों के खड़े होने की चर्चा है। हालांकि वास्तविक समर्थन का आंकड़ा मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा। 

 कांग्रेस ने बदला खेल का पूरा गणित:

ममता चपलोत के मैदान में आने के बाद कांग्रेस ने भी राजनीतिक स्थिति को देखते हुए अपना कदम बदला। कांग्रेस प्रत्याशी सोसर देवी ने अध्यक्ष पद से अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद मुकाबला भाजपा की सीमा और निर्दलीय ममता चपलोत के बीच सीधा हो गया। कांग्रेस की ओर से ममता को समर्थन दिए जाने की चर्चाओं ने 13-12 के सामान्य बहुमत को असामान्य राजनीतिक मुकाबले में बदल दिया है।  अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा के सभी 13 पार्षद पार्टी प्रत्याशी के साथ खड़े रहते हैं या उनमें से कुछ का रुख बदलता है। दूसरी ओर कांग्रेस के 12 पार्षदों का रुख भी चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकता है।

 नोटिस प्रकरण ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी: अध्यक्ष पद के चुनाव के बीच राजेश चपलोत की संपत्तियों पर नगरपालिका और यूडीए की ओर से जारी नोटिस भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं। 17 सितंबर को उनकी ‘देवीलीला पैलेस’ संपत्ति पर नगरपालिका की ओर से अवैध निर्माण एवं भू-उपयोग से संबंधित नोटिस चस्पा किए जाने की जानकारी सामने आई। नोटिस में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धाराओं 194 एवं 245 के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया था। इसके बाद चपलोत की अन्य संपत्ति पर यूडीए के नोटिस की खबर भी सामने आई। कार्रवाई की समय-सीमा को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल और चर्चाएं उठीं, हालांकि प्रशासनिक पक्ष से इसे नियमों के तहत की जाने वाली कार्रवाई बताया गया है। इसलिए कार्रवाई को सीधे राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ना फिलहाल एक राजनीतिक दावा ही माना जाएगा। 

 सोशल मीडिया पर ‘टीम चेयरमैन’ की चर्चा

इधर राजेश चपलोत के समर्थन में सोशल मीडिया पर भी गतिविधियां तेज होने की बात सामने आ रही है। समर्थकों की ओर से ‘टीम चेयरमैन राजेश चपलोत’ जैसे संदेश प्रचारित किए जा रहे हैं। इससे साफ है कि चुनाव अब सिर्फ पालिका सदन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर की राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। राजेश चपलोत का राजनीतिक सफर भी इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बनाता है। वे पूर्व में पालिका उपाध्यक्ष रह चुके हैं और एक समय कार्यवाहक पालिकाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। ऐसे में उनके द्वारा पत्नी को अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतारना स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

 सोमवार को खुलेगा पत्तों का खेल:

अब सभी की निगाहें सोमवार को होने वाले अध्यक्ष पद के मतदान पर टिकी हैं। 25 सदस्यीय सदन में भाजपा के पास 13 और कांग्रेस के पास 12 पार्षद हैं। संख्या के लिहाज से भाजपा एक कदम आगे है, लेकिन निर्दलीय ममता चपलोत के मैदान में आने और कांग्रेस के संभावित समर्थन ने इस गणित को बेहद दिलचस्प बना दिया है। राजेश चपलोत के पुत्र ने भी समर्थकों से मतदान के दौरान नगरपालिका में उपस्थित रहने का आह्वान किया है। ऐसे में सोमवार को नगरपालिका परिसर के बाहर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।

फिलहाल फतहनगर-सनवाड़ की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 13 पार्षदों का भाजपा बहुमत पार्टी की सीमा सोनी को अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचा पाएगा, या हाइब्रिड फार्मूले से मैदान में उतरी ममता चपलोत अपनों के असंतोष और विपक्षी समर्थन के सहारे पूरा राजनीतिक गणित बदल देंगी? इसका फैसला सोमवार को पार्षदों के मतदान से होगा।

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