फतहनगर - सनवाड

सुख बाहरी साधनों में नहीं, आत्मा की शांति और पुण्य जागरण में निहित है — युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी

गुरु भक्ति से सजा पावनधाम, आदर की चादर ओढ़ाकर युवाचार्यश्री का अभिनंदन एवं वर्ष 2028 चातुर्मास हेतु रखी विनती

23 मई, फतहनगर। अम्बेश गुरु मेमोरियल संस्थान पावनधाम में शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा. ने सुखविपाक सूत्र का गहन विवेचन करते हुए कहा कि जीवन का वास्तविक आनंद बाहरी वैभव, भौतिक साधनों अथवा क्षणिक सुविधाओं में नहीं, बल्कि आत्मा की शांति, संयम, सद्कर्म और पुण्य जागरण में निहित है।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य सुख की तलाश बाहर कर रहा है, जबकि सुख का वास्तविक स्रोत भीतर की निर्मलता और आत्मिक संतुलन है। सुखविपाक सूत्र यह शिक्षा देता है कि पूर्व जन्मों एवं वर्तमान जीवन में किए गए शुभ कर्मों का परिणाम ही जीवन में सुख, शांति और अनुकूलता के रूप में प्राप्त होता है।
युवाचार्यश्री ने कहा कि जब मनुष्य धर्म, दया, विनम्रता, सेवा, त्याग और संयम को अपने जीवन में स्थान देता है, तब उसके भीतर आत्मिक आनंद का उदय होता है। केवल धन, पद और प्रतिष्ठा से जीवन में स्थायी सुख प्राप्त नहीं किया जा सकता। यदि मन अशांत है, विचार विकृत हैं और व्यवहार कठोर है, तो बाहरी उपलब्धियाँ भी जीवन को आनंदमय नहीं बना सकतीं।
उन्होंने बताया सुखविपाक सूत्र कर्म सिद्धांत की गहराई को उजागर करता है। “जैसा कर्म, वैसा परिणाम” यही इस सूत्र का मूल संदेश है। शुभ भाव, मधुर व्यवहार, करुणा और धर्म आराधना जीवन को सुखमय बनाते हैं, जबकि क्रोध, अहंकार, लोभ और हिंसा अंततः दुःख का कारण बनते हैं।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि व्यक्ति बाहरी प्रतिस्पर्धा से अधिक अपने अंतर्मन को सुधारने का प्रयास करे। आत्मचिंतन, स्वाध्याय और धर्म साधना ही जीवन को वास्तविक आनंद और संतोष प्रदान कर सकती है।
इसदौरान धर्मसभा में अम्बेश-सौभाग्य-मदन परम्परा का नेतृत्व कर रहे उपप्रवर्तक कोमल मुनिजी एवं हर्षित मुनिजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में अम्बेश गुरु मेमोरियल संस्थान पावनधाम की ओर से पावनधाम प्रमुख प्रकाशचन्द सिंघवी, महामंत्री दिनेश सिंघवी, नितिन सेठिया, पारसमल बाफना, गणेश मेहता, आशीष पीपाड़ा, मनोज कोठारी, निलेश पोखरणा, बाबूलाल उनिया सहित अनेक श्रद्धालुओं ने युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा. को आदर की चादर ओढ़ाकर भावभीना वंदन-सम्मान किया।
इस अवसर पर हितमित भाषी हितेन्द्र ऋषिजी म.सा., उपप्रवर्तिनी दिव्यज्योति जी म.सा.,वर्धमान तप आराधिका प्रफुला जी म.सा., उपप्रवर्तिनी विजयप्रभा जी म.सा., उपप्रवर्तिनी मंजूल ज्योति जी म.सा.
महासती शीतलजी एवं साध्वी एष्णा श्रीजी म.सा. ने “केसरिया… केसरिया…” की मंगलमयी स्वर लहरियों के बीच भावपूर्ण अनुमोदना प्रदान की।
कार्यक्रम के दौरान युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा. द्वारा उपप्रवर्तिनी विजयप्रभा जी म.सा. को आदर की चादर प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं विजयप्रभा जी महासती एवं विद्याश्री जी ने प्रमुख साध्वीवृंद को आदर स्वरूप शॉल ओढ़ाकर साध्वीवृंद का अभिनंदन किया।
अंत में पावनधाम संस्थान के प्रमुख प्रकाशचन्द सिंघवी के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने वर्ष 2028 में फतहनगर अम्बेश गुरु मेमोरियल संस्थान पावनधाम में युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी म.सा. आदि ठाणा के चातुर्मास हेतु जोरदार विनती रखी गई। युवाचार्य महेन्द्र ऋषि जी म.सा का पावनधाम में नियमित प्रवचन प्रांत 9 बजे से 10 बजें तक रहेगा।

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