फतहनगर - सनवाड

स्मृतियों में आज भी जीवंत हैं हनुमान प्रसाद प्रभाकर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री स्वर्गीय हनुमान प्रसाद प्रभाकर की आज पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए विद्यार्थी जीवन का एक पुराना संस्मरण अचानक स्मृतियों में ताजा हो उठा।

बात उस समय की है, जब मैं 12वीं कक्षा में मावली में अध्ययन कर रहा था। उस दौर में तहसील स्तर पर ही 10+2 विद्यालय खोले गए थे। फतहनगर में 12वीं कक्षा शुरू करवाने की मांग को लेकर विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह था। हमने इस मांग को लेकर बाजार बंद करवाया और जोरदार आंदोलन किया। हमारा उद्देश्य स्पष्ट था—फतहनगर के विद्यार्थियों को 12वीं की पढ़ाई के लिए मावली न जाना पड़े और उन्हें अपने ही शहर में उच्च शिक्षा का अवसर मिले।

उस समय मैं छात्रसंघ का अध्यक्ष था। आंदोलन की गूंज तत्कालीन मंत्री स्वर्गीय हनुमान प्रसाद प्रभाकर तक भी पहुंची। उन्होंने स्थानीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनोहर लाल त्रिपाठी एवं इब्राहिम मंसूरी के माध्यम से हमें मावली बुलवाया।

हम विद्यार्थी उनसे मिलने पहुंचे। मन में आंदोलन की चिंता भी थी और अपनी मांग पूरी होने की उम्मीद भी। प्रभाकर जी ने हमारी बात गंभीरता से सुनी और हमें आश्वस्त किया कि फतहनगर में जल्द ही 12वीं कक्षा खोलने के आदेश करवाए जाएंगे।

उनके शब्दों में ऐसा विश्वास था कि हमें लगा, अब हमारी मांग जरूर पूरी होगी। और हुआ भी वही। तत्कालीन प्रदेश सरकार में प्रभावशाली भूमिका रखने वाले प्रभाकर जी ने अपने प्रयासों से महज दो दिन में ही फतहनगर में 12वीं कक्षा खोलने के आदेश जारी करवा दिए।

विद्यार्थियों का वह आंदोलन, हमारी वह जिद और प्रभाकर जी का तत्काल समाधान करवाने का वह अंदाज आज भी मेरी स्मृतियों में बिल्कुल ताजा है। उस घटना ने मुझे यह सिखाया कि जनहित से जुड़ी मांग यदि दृढ़ता और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जाए तथा जनप्रतिनिधि संवेदनशील हो, तो उसका परिणाम भी शीघ्र मिल सकता है।

आज उनकी पुण्यतिथि पर उस पुराने प्रसंग को याद करते हुए मन श्रद्धा से भर जाता है। स्वर्गीय हनुमान प्रसाद प्रभाकर केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि आमजन और विद्यार्थियों की समस्याओं को समझने वाले संवेदनशील जननेता थे। फतहनगर में 12वीं कक्षा खुलवाने में उनके योगदान को हम विद्यार्थी जीवन की एक अविस्मरणीय उपलब्धि के रूप में आज भी याद करते हैं।

पुण्यतिथि पर स्वर्गीय हनुमान प्रसाद प्रभाकर को कोटि-कोटि नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि।

— शंकर लाल चावड़ा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *