उदयपुर, 29 जुलाई। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत प्राप्त सब्सिडी लौटाए जाने के बाद अब राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से संबंधित इसी योजना के अनुदान को लेकर सवाल फिरसे उठने लगे हैं। अधिवक्ता एवं भाजपा प्रदेश मीडिया प्रकोष्ठ के पूर्व सदस्य डॉ. विजय विप्लवी ने सवाल किया है कि यदि चौधरी ने नैतिक आधार पर सब्सिडी वापस की है तो क्या राज्यपाल कटारिया भी अपने नाम से स्वीकृत बताए जा रहे ₹17.04 लाख के अनुदान को वापस करेंगे?
डॉ. विप्लवी ने कहा कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की एनएचएम योजना के तहत भागीरथ चौधरी और गुलाबचंद कटारिया द्वारा एक ही योजना एवं एक ही आधार पर बागवानी अनुदान लिए जाने की बात सामने आई है। समाचारों के अनुसार चौधरी ने संबंधित सब्सिडी वापस कर दी है। ऐसे में अब यह महत्वपूर्ण नैतिक प्रश्न है कि समान परिस्थितियों में नैतिकता का मानदंड भी समान होना चाहिए या नहीं।
उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के किसान के लिए योजना में 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान बताया जाता है, जबकि कटारिया के फार्म हाउस से संबंधित लगभग ₹22.12 लाख की परियोजना लागत पर ₹17.04 लाख यानी करीब 77 प्रतिशत अनुदान स्वीकृत होने की बात सामने आई है।
डॉ. विप्लवी ने मांग की कि कटारिया से संबंधित अनुदान की पात्रता की श्रेणी, स्वीकृति का आधार तथा संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएँ। यदि सामान्य किसान से अलग किसी विशेष श्रेणी अथवा प्रावधान के तहत यह अनुदान स्वीकृत हुआ है तो उसकी स्पष्ट जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति से सामान्य नागरिक की तुलना में उच्चतर नैतिक मानदंडों की अपेक्षा होती है। इसलिए इस मामले में निष्पक्ष जांच की पहल होनी चाहिए और यदि अनुदान की पात्रता अथवा नैतिक औचित्य पर कोई प्रश्न बनता है तो ₹17.04 लाख सरकारी कोष में वापस किए जाने चाहिए।
डॉ. विप्लवी ने कहा, “यह केवल ₹17.04 लाख की राशि का प्रश्न नहीं है, बल्कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक पद की गरिमा का सवाल है। नैतिकता केवल भाषण का विषय नहीं, आचरण का विषय है। भागीरथ चौधरी ने सब्सिडी लौटाकर अपनी नैतिक कसौटी तय कर दी है। अब देखना है कि राज्यपाल कटारिया उस कसौटी पर स्वयं को कैसे साबित करते हैं।”

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