फतहनगर - सनवाड

बस्सी में 9 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का पूर्णाहुति के साथ भव्य समापन, 36 श्रद्धालुओं के हुए विविध संस्कार

चित्तोड़गढ़। धर्म की नगरी बस्सी के लक्ष्मीनाथ सत्संग भवन (बाग) में चल रहे दो दिवसीय 9 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आज रविवार, 31 मई को पूर्णाहुति और महाप्रसाद के साथ भव्य समापन हो गया। गायत्री शक्तिपीठ चित्तौड़गढ़ और समस्त ग्रामवासी बस्सी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पुनीत महायज्ञ के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। वैदिक मंत्रोच्चार और ‘स्वाहा’ की गूंज से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक और देवमय हो गया।

वैदिक परंपरा से संपन्न हुए 36 संस्कार:

गायत्री परिवार के ‘व्यक्ति निर्माण से परिवार और समाज निर्माण’ के सूत्र को साकार करते हुए, महायज्ञ के अंतिम दिन भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण संस्कार निशुल्क संपन्न कराए गए। देव शक्तियों के आह्वान और वैदिक मंत्रों के बीच आज कुल 36 संस्कार संपन्न हुए। इनमें 28 दीक्षा संस्कार, 4 नामकरण संस्कार, 3 विद्यारंभ संस्कार और पुंसवन संस्कार शामिल रहे। गायत्री परिवार के विद्वान आचार्यों ने कर्मकांड संपन्न कराते हुए श्रद्धालुओं को संस्कारवान जीवन जीने, बुराइयां छोड़ने और सन्मार्ग पर चलने का संकल्प दिलाया।

सत्साहित्य ने किया विचार क्रांति का संचार:

यज्ञ स्थल पर परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सत्साहित्य (युग निर्माण साहित्य) का एक विशेष ज्ञान रथ (बुक स्टॉल) भी लगाया गया। बड़ी संख्या में युवा और ग्रामवासियों ने वैचारिक व आध्यात्मिक पुस्तकों को अपनाकर ‘विचार क्रांति अभियान’ में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

मंत्रोच्चार के साथ दी गई आहुतियां:

रविवार प्रातः 8 बजे से ही पीले वस्त्रों में सजे श्रद्धालु यज्ञ मंडप में पहुंचने लगे। सभी 9 यज्ञ कुण्डों पर यजमानों ने सपरिवार बैठकर विश्व शांति, लोकमंगल, पर्यावरण शुद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना के साथ गायत्री महामंत्र और महामृत्युंजय मंत्र से आहुतियां प्रदान कीं। व्यासपीठ से आचार्यों ने प्रज्ञागीतों और अपने ओजस्वी उद्बोधन से जनसमूह को गुरुदेव के युग निर्माण मिशन से जुड़ने का भावभरा आमंत्रण दिया।

दोपहर 11 बजे महायज्ञ की पूर्णाहुति संपन्न हुई। तदुपरांत देवमाता गायत्री की भव्य आरती उतारी गई और शांति पाठ किया गया। आयोजन के अंत में विशाल भंडारे (महाप्रसाद) की व्यवस्था रही, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। इस संपूर्ण दो दिवसीय आयोजन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने में गायत्री शक्तिपीठ चित्तौड़गढ़ के कार्यकर्ताओं और बस्सी के समस्त गणमान्य नागरिकों, युवाओं व माताओं-बहनों का अत्यंत सराहनीय योगदान रहा।

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