उदयपुर

धीरे-धीरे रंग ला रहा है उदयपुर कलक्टर का मिशन कोटड़ा

उदयपुर। जिले के दूरस्थ जनजाति अंचल कोटड़ा के अनाथ और जरूरतमंद बच्चों और उनके परिवारजनों को पालनहार योजना का लाभ दिलाने के लिए जिला कलक्टर ताराचंद मीणा द्वारा शुरू किया गया ‘मिशन कोटड़ा’ धीरे-धीरे रंग ला रहा है। बच्चों के चिन्हीकरण और उनकी पात्रता देखने के बाद आवश्यक दस्तावेजों को तैयार करवाते हुए पालनहार योजना से जोड़ने की मुहिम में समस्त सरकारी कार्मिक और स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं।
*अब तक 300 बच्चों को जोड़ा*
कलक्टर ताराचंद मीणा ने बताया कि मिशन के तहत की गई सर्वे में अब तक नए 1460 बच्चें चिह्नित किए गए हैं। वर्तमान में पंचायत समिति में कुल पात्र 767 पालनहार परिवारों के 1373 बच्चें योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें से अभियान के दौरान 138 पालनहार परिवारों के 300 बच्चों को जोड़कर लाभ देना प्रारंभ कर दिया गया है। शेष बच्चों के आवश्यक दस्तावेजों को तैयार करने और इनको जोड़ने के लिए विभागीय कार्मिक पूरे जोर-शोर से जुड़े हुए हैं।
*262 राजस्व गांवों में चल रही मुहिम*
कलक्टर के निर्देशों के बाद पंचायत समिति कोटड़ा और इसकी समस्त ग्राम पंचायतों का पूरा स्टॉफ और ग्राम पंचायत स्तरीय कार्मिक सर्वे कार्य के साथ बच्चों को इस योजना में जोड़ने के लिए आवश्यक दस्तावेजों को तैयार करवाने में लगे हुए हैं। विकास अधिकारी धनपतसिंह ने बताया कि पंचायत समिति क्षेत्र के 262 राजस्व गांवों में सर्वे दल कार्य कर रहे हैं। इन सर्वे दलों में समस्त नियमित व संविदा कार्मिक, आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता, आशा सहयोगिनी, एएनएम, स्वच्छ अभियान के कार्मिक, हेंडपंप मिस्त्री, पंचायत सहायक, शिक्षक इत्यादि लगे हुए हैं।
*200 व्हाट्सअप गु्रप से मॉनिटरिंग*
अभियान के तहत सर्वे दलों द्वारा की जा रही कार्यवाही और इसमें चिह्नित बच्चों के दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया और अभिभावकों को प्रेरित करने आदि के कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए 200 व्हाट्सअप गु्रप तैयार किए गए हैं जिन पर प्रतिदिन निर्देश व संदेश पहुंचाएं जा रहे हैं। विकास अधिकारी के अनुसार इन गु्रप्स पर विडियो संदेश तैयार कर भेजे जा रहे हैं ताकि अभिभावकों को स्थानीय बोली में समझाया जा सके।
*हर काम प्रशासन कर रहा*
विकास अधिकारी सिंह ने बताया कि बच्चों को चिह्नित करने और उनको लाभ दिलाने तक की 10 चरण की संपूर्ण प्रक्रिया को सरकारी कार्मिक ही पूरा कर रहे हैं। बच्चों को ढूंढने, उनका रिकार्ड खंगालने, उनके समस्त प्रकार के दस्तावेज यथा आधार कार्ड, जन आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, परिजनों का मृत्यु प्रमाण पत्र, नाता प्रमाण पत्र, अध्ययन प्रमाण पत्र, राशन कार्ड आदि तैयार करवाने के साथ आधार को मोबाइल से लिंक करने, राशन कार्ड में नाम जुड़वाने, पालनहार का फॉर्म भरने, बच्चों का फोटो खिंचवाने सहित सभी काम प्रशासन द्वारा करवाया जा रहा है।
*घर से ईमित्र तक लाकर बना रहे प्रमाण पत्र*
विकास अधिकारी सिंह ने बताया कि बच्चों को घर से ईमित्र तक लाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा कई प्रकार की व्यवस्थाएं की है। इसके लिए 11 गाडि़यां लगाई गई हैं जो बच्चों को घरों से लेकर ईमित्र तक आती है और यहां पर उनके आधार व अन्य प्रमाण पत्र तैयार किए जा रहे हैं। यहां तक कि बच्चों के फोटो खिंचवाने का कार्य भी सरकारी स्तर पर फोटोग्राफर के माध्यम से करवाया जा रहा है। कलक्टर मीणा के निर्देशों पर आधार के लिए 4 नई मशीनें भिजवाई गई हैं जिससे अब 10 मशीनों से आधार तैयार करवाएं जा रहे हैं।

 

 

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