कानोड़(भरत जारोली)। निकटवर्ती श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ गौशाला बांसड़ा में तृतीय दिवस के श्रीमद् भागवत कथा में व्यासपीठ से कृष्ण किंकर महाराज ने संतो ऋषियों की अधिष्ठात्री गौ माता को ही बताते हुए प्रकट किया कि इस कलिकाल में व्यक्ति समस्त लोगों को भोगता हुआ जीवन व्यतीत करता है लेकिन पुण्य कर्मों के संचय से व्यक्ति की आत्मा जन्म जन्मांतर से छुटकारा पाने के लिए भवसागर से पार करने के लिए गौ माता का सहारा लेकर गोलोक धाम में पहुंचते हैं। उसके बाद में उन्हें किसी भी जीव में जन्म लेने का अवसर प्राप्त नहीं होता और गोलोक धाम से ऊंचा कोई धाम नहीं जहां परमात्मा की शरणागत प्राप्त होती है। मनुष्य जन्म पूर्व जन्म में किए गए कार्यों के प्रारब्ध स्वरूप मिलता है और उस जीवन को भी अगर व्यक्ति अनर्गल बातों में या कार्यों में व्यतीत कर देता है तो उसका जीवन निरर्थक हो जाता है और वही जीवन अगर परमात्मा के नाम का स्मरण करता हुआ जीवन व्यतीत करता है परमात्मा के धाम को पहुंचाता है। ज्ञानयोग भक्तियोग कर्मयोग का विस्तार पूर्वक जीवंत दर्शन प्रकट किया। शिव पार्वती विवाह चरित्र के साथ ही मोक्ष के 5 उपाय पर प्रकाश डाला। सुखदेव और राजा परीक्षित का मिलन प्रसंग पर सभी भावविभोर हो गए। संस्थापक सचिव श्याम चौबीसा प्राणी मित्र ने बताया कि कथा श्रवण करने हेतु दत्त गिरि जी महाराज राम दाता धूनी बंबोरा,रमेश चंद्र सीरवी उपखंड अधिकारी, मोहकम सिंह तहसीलदार, विशाल कुमार विकास अधिकारी पंचायत समिति भिंडर, महावीर प्रसाद हाथी भगवती लाल पण्डिया, उपाध्यक्ष भारत विकास परिषद, ब्रह्मदत्त चौबीसा कानोड प्रकाश चंद्र वया जगदीश सुथार स्वामी विवेकानंद परिषद ने गो पूजन कर गोवंश को गुड़ का भोग लगाया। तहसीलदार ने अपने वक्तव्य में प्रकट किया कि हम सब का बड़ा सौभाग्य है। हम सभी ने भारत भूमि पर जन्म लिया और संस्कृति के साथ साथ प्रभु चरित्रों का गुणगान सुनने का अवसर प्राप्त हो रहा है । उपखंड अधिकारी ने गौ शाला की व्यवस्था देखकर प्रसन्नता व्यक्त की तथा अपील की कि सभी को गौ सेवा के क्षेत्र में आगे आने की आवश्यकता है। गौशाला संचालन किसी व्यक्ति विशेष का ही कार्य नहीं वरन सभी व्यक्तियों को सहभागी बनकर इस कार्य को गति देनी चाहिए। अतिथियों का स्वागत गोपाल कृष्ण चौबीसा महामंत्री, हीरालाल व्यास संगठन महामंत्री,रामेश्वर लाल व्यास संरक्षक, विमल प्रसाद लिखमावत, हितेश कुमार चौबीसा, गिरधारी लाल पालीवाल, मार्गदर्शक मिट्ठूलाल, देवकरण शर्मा आदि ने किया।
कानोड़ में श्रीमद् भागवत कथा कार्यक्रमः भवसागर से वेतरणी तो गाय ही पार कराएगीः कृष्ण किंकरजी महाराज

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