जिला प्रचारक गजेंद्र जी भाईसाहब बोले – हम सोभाग्य शाली है कि हमारा जन्म भारत की भूमि पर हुआ संघ कुछ नहीं करेगा और स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेगा, दुनिया भारत की ओर देख रही है, हमें भारत को ऊंचाइयों पर ले जाना है
फतेहनगर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, खण्ड फतेहनगर के तत्वावधान में रविवार को विजयादशमी उत्सव एवं विराट पथ संचलन का आयोजन उत्साह, अनुशासन एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। पूर्ण गणवेश में सुसज्जित स्वयंसेवकों के अनुशासित कदमताल से पूरा नगर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। नगर के विभिन्न मार्गों पर समाजजनों, मातृशक्ति एवं युवाओं ने पुष्पवर्षा, भव्य स्वागत द्वारों एवं आरती के माध्यम से पथ संचलन का अभूतपूर्व एवं आत्मीय स्वागत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री द्वारिकाधीश मंदिर भूमि प्रांगण में हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. रविंद्र कुमार गोयल उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला संघचालक भारत सिंह झाला ने की। कार्यक्रम में खण्ड संघचालक धनपाल सेठ तथा मुख्य बौद्धिककर्ता जिला प्रचारक गजेंद्र जी भाईसाहब का सान्निध्य प्राप्त हुआ।
राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवक की भूमिका महत्वपूर्ण – जिला प्रचारक
मुख्य बौद्धिककर्ता जिला प्रचारक गजेंद्र जी भाईसाहब ने अपने उद्बोधन में संघ के कार्य, स्वयंसेवक के दायित्व एवं राष्ट्र निर्माण की व्यापक अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ कुछ नहीं करेगा और स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेगा। संघ का उद्देश्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं संगठनात्मक चेतना का जागरण करना है। संघ व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण उत्थान का कार्य करता है।
उन्होंने कहा कि संघ समाज से केवल समय मांगता है। आज पूरी दुनिया भारत की ओर आशा और अपेक्षा से देख रही है। भारत के पास प्राचीन संस्कृति, समृद्ध परंपरा, ज्ञान और सामर्थ्य का विशाल भंडार है। आवश्यकता है कि हम अपनी क्षमताओं को पहचानें और संगठित होकर भारत को विश्व में सर्वोच्च ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए संकल्पित हों। राष्ट्र का उत्थान केवल शासन अथवा किसी एक संस्था के प्रयास से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।
पंच परिवर्तन से होगा समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन
जिला प्रचारक ने संघ द्वारा प्रतिपादित पंच परिवर्तन की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि समाज में व्यापक एवं स्थायी परिवर्तन के लिए प्रत्येक परिवार और नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख आयाम जिनमें कुटुम्ब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य एवं स्व बोध है।
चिकित्सा सेवा समाज के प्रति समर्पण का माध्यम – डॉ. रविंद्र कुमार गोयल
मुख्य अतिथि डॉ. रविंद्र कुमार गोयल ने अपने उद्बोधन में कहा कि चिकित्सा सेवा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि मानवता की सेवा एवं समाज के प्रति दायित्व निभाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। चिकित्सक का दायित्व रोग उपचार के साथ पीड़ित मानवता के प्रति सेवा और संवेदनशीलता का भाव रखना भी है।*
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार स्वयं चिकित्सक थे, जिन्होंने व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन से ऊपर उठकर अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज के संगठन के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा और संघ का सेवा भाव दोनों ही समाज के प्रति समर्पण की भावना से प्रेरित हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी योग्यता एवं सामर्थ्य का उपयोग समाजहित और राष्ट्र निर्माण में करना चाहिए।
घोष की धुन पर निकला विराट पथ संचलन, मार्ग में जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत
बौद्धिक कार्यक्रम के पश्चात पूर्ण गणवेश में सुसज्जित स्वयंसेवकों का विराट पथ संचलन श्री द्वारिकाधीश मंदिर भूमि प्रांगण से प्रारंभ हुआ। संचलन हिमालय बावजी, चंगेरी रोड, शिव मंदिर, कन्या पाठशाला, मंडी रोड, बस स्टैंड, मेन चौराहा, प्रताप चौराहा एवं स्टेडियम रोड होते हुए पुनः श्री द्वारिकाधीश मंदिर भूमि प्रांगण पहुंचकर संपन्न हुआ।
संचलन के निर्धारित मार्ग पर नगरवासियों में विशेष उत्साह एवं उमंग देखने को मिली। नगर के विभिन्न स्थानों पर समाजजनों द्वारा भव्य स्वागत द्वार सजाए गए थे। मातृशक्ति एवं बहनों ने पारंपरिक रूप से आरती उतारकर स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया, वहीं अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा कर पथ संचलन का स्वागत किया गया। विभिन्न सामाजिक एवं व्यावसायिक संगठनों, युवाओं तथा नगरवासियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों ने अनुशासित कदमताल करते स्वयंसेवकों का आरती एवं पुष्पवर्षा से अभिनंदन किया। जगह-जगह हुए स्वागत, सुसज्जित स्वागत द्वार एवं मातृशक्ति की सक्रिय सहभागिता ने पूरे नगर को उत्सवमय बना दिया। घोष की धुन पर एक साथ कदम बढ़ाते स्वयंसेवकों का दृश्य नगरवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का संकल्प
विजयादशमी उत्सव एवं विराट पथ संचलन के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संगठन, अनुशासन, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया। कार्यक्रम में नगरवासियों की व्यापक सहभागिता एवं विभिन्न स्थानों पर हुए आत्मीय स्वागत ने सामाजिक एकजुटता एवं सांस्कृतिक चेतना का परिचय दिया।
यह आयोजन केवल एक उत्सव अथवा पथ संचलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में समाज की सामूहिक सहभागिता एवं संकल्प का प्रभावी प्रकटीकरण बना।


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