फतहनगर। फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका के उपाध्यक्ष पद के चुनाव में मंगलवार को राजनीतिक घटनाक्रम ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया। 25 सदस्यीय पालिका में बहुमत के बावजूद भाजपा उपाध्यक्ष पद अपने नाम नहीं कर सकी और कांग्रेस प्रत्याशी श्रेया गर्ग ने जीत दर्ज करते हुए उपाध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया। श्रेया गर्ग को 13 मत, जबकि भाजपा प्रत्याशी मुकेश कुमार खटीक को 11 मत मिले। एक मत निरस्त घोषित किया गया।परिणाम सामने आते ही पालिका की राजनीति में क्रॉस वोटिंग को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। भाजपा के 13 पार्षदों के मुकाबले कांग्रेस के 12 पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को 13 मत मिलना राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। हालांकि किस पार्षद ने किसके पक्ष में मतदान किया, यह मतदान की गोपनीयता के कारण आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया, लेकिन राजनीतिक हलकों में भाजपा के दो पार्षदों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने की चर्चा रही।

परिणाम के बाद निकला विजय जुलूस, एक ही जीप में दिखे कांग्रेस विधायक और राजेश चपलोत
उपाध्यक्ष चुनाव का परिणाम घोषित होते ही फतहनगर-सनवाड़ में कांग्रेस समर्थकों में उत्साह का माहौल बन गया। पालिका अध्यक्ष ममता चपलोत एवं नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष श्रेया गर्ग के समर्थन में विजय जुलूस निकाला गया।जुलूस का सबसे चर्चित दृश्य भाजपा के निर्वाचित पार्षद राजेश चपलोत की मौजूदगी रही। राजेश चपलोत जिस जीप में सवार थे, उसमें कांग्रेस विधायक पुष्कर लाल डांगी सहित कांग्रेस के पार्षद भी मौजूद थे। जुलूस में चपलोत समर्थक एवं कांग्रेस कार्यकर्ता नारे लगाते और पुष्पवर्षा करते हुए चल रहे थे। अध्यक्ष ममता चपलोत और उपाध्यक्ष श्रेया गर्ग के समर्थकों ने भी जीत का जश्न मनाया।राजेश चपलोत की जुलूस में सक्रिय मौजूदगी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं और तेज हो गईं। निकाय चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों का यह दृश्य फतहनगर-सनवाड़ की स्थानीय राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया। जोधपुर से राहत मिलते ही मतदान स्थल पहुंचे राजेश चपलोतअध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान मतदान के तुरंत बाद भाजपा पार्षद राजेश चपलोत को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्होंने न्यायिक राहत के लिए राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया। जोधपुर से राहत मिलने के बाद वे उपाध्यक्ष पद के मतदान में शामिल होने के लिए फतहनगर पहुंचे।फतहनगर पहुंचने पर समर्थकों ने राजेश चपलोत की जोरदार अगवानी की। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी एवं नगरपालिका अध्यक्ष ममता चपलोत भी मौजूद थीं। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों की राजनीतिक भूमिका एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रही। 13-12 के बहुमत का गणित उपाध्यक्ष चुनाव में बदलानगरपालिका चुनाव में भाजपा ने 25 में से 13 वार्डों में जीत हासिल कर बहुमत प्राप्त किया था, जबकि कांग्रेस के खाते में 12 सीटें आई थीं। सामान्य राजनीतिक गणित के अनुसार भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में 13 मत जाने की संभावना थी, लेकिन उपाध्यक्ष चुनाव में परिणाम इसके उलट आया।

कांग्रेस प्रत्याशी श्रेया गर्ग को 13 मत मिलने और भाजपा प्रत्याशी मुकेश खटीक को 11 मत मिलने से यह स्पष्ट हुआ कि सदन के भीतर राजनीतिक समीकरण स्थिर नहीं रहे। एक मत निरस्त होने से कुल 25 मतों का हिसाब पूरा हुआ। परिणाम ने अध्यक्ष चुनाव के दौरान बने समीकरणों को भी और अधिक स्पष्ट कर दिया।टिकट नहीं मिलने से शुरू हुआ विवाद, निर्दलीय मैदान में उतरीं ममता
निकाय चुनाव के दौरान भाजपा पार्षद राजेश चपलोत ने अपनी पत्नी ममता चपलोत के लिए भाजपा से टिकट की मांग की थी। टिकट नहीं मिलने के बाद राजेश चपलोत स्वयं चुनाव मैदान में उतरे और निर्वाचित होकर भाजपा के 13 पार्षदों में शामिल हुए।
इसके बाद अध्यक्ष पद के चुनाव में ममता चपलोत ने हाइब्रिड फार्मूले के तहत निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकी। कांग्रेस ने उन्हें समर्थन दिया। 13 भाजपा पार्षदों के बहुमत के बावजूद ममता चपलोत को 14 पार्षदों का समर्थन मिला और वे नगरपालिका अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। इसके बाद उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस की श्रेया गर्ग की जीत ने स्थानीय राजनीति के समीकरण को और बदल दिया।
भाजपा के भीतर टिकट वितरण को लेकर उठे सवाल
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के बाद भाजपा के भीतर टिकट वितरण एवं स्थानीय स्तर पर रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक चर्चाओं में यह बात प्रमुखता से सामने आ रही है कि यदि राजेश चपलोत की पत्नी ममता चपलोत को पार्टी टिकट मिल जाता तो निकाय के मौजूदा समीकरण अलग हो सकते थे।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार टिकट वितरण के निर्णय से उपजा असंतोष धीरे-धीरे बढ़ा और इसका असर अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष दोनों चुनावों में दिखाई दिया। हालांकि इन राजनीतिक आकलनों पर पार्टी की ओर से अलग-अलग स्तर पर अपनी स्थिति रखी जा सकती है।
एक ही घटनाक्रम में बदली स्थानीय राजनीति की तस्वीर
फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका में पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति की पूरी तस्वीर बदल दी है। चुनाव परिणाम में भाजपा को बहुमत मिलने के बाद जहां अध्यक्ष पद पर निर्दलीय ममता चपलोत की जीत ने राजनीतिक समीकरण बदला, वहीं उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस की श्रेया गर्ग की जीत ने 13-12 के बहुमत को भी प्रभावहीन कर दिया।
एक ओर भाजपा के पास सदन में संख्या बल है, वहीं दूसरी ओर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर बने नए समीकरणों ने पालिका की आगामी कार्यप्रणाली को लेकर भी राजनीतिक दिलचस्पी बढ़ा दी है। खास तौर पर भाजपा पार्षद राजेश चपलोत की अध्यक्ष पत्नी ममता चपलोत के साथ राजनीतिक सक्रियता और कांग्रेस नेताओं के साथ उनकी सार्वजनिक मौजूदगी आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति का महत्वपूर्ण पहलू बनी रह सकती है।
फिलहाल उपाध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद श्रेया गर्ग के समर्थकों में उत्साह है। वहीं भाजपा के लिए बहुमत होने के बावजूद लगातार दो प्रमुख पदों पर बदले समीकरण आत्ममंथन का विषय बने हुए हैं। फतहनगर-सनवाड़ की राजनीति में अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि निर्वाचित अध्यक्ष ममता चपलोत और उपाध्यक्ष श्रेया गर्ग के नेतृत्व में नगरपालिका की कार्यप्रणाली किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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