**फतहनगर। राजकीय सेवा से सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम प्रायः औपचारिक होते हैं, लेकिन *राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, चंगेडी* के प्रधानाचार्य *मोहनलाल स्वर्णकार* की विदाई ने भावनाओं, सम्मान और जनसहभागिता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसे क्षेत्र लंबे समय तक याद रखेगा। 36 वर्षों की गौरवपूर्ण शैक्षिक सेवा पूर्ण करने के बाद आयोजित विदाई समारोह में पूरा गांव उमड़ पड़ा और हर आंख नम दिखाई दी।
प्रधानाचार्य स्वर्णकार ने अपने लंबे सेवाकाल का अधिकांश समय चंगेड़ी विद्यालय में बिताया। इस दौरान उन्होंने केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि विद्यालय के समग्र विकास और अनुशासित शैक्षिक वातावरण के निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया। उनके प्रयासों से विद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ भौतिक संसाधनों के विकास में भी उल्लेखनीय प्रगति की। यही कारण रहा कि वे विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बन गए।
विदाई के अवसर पर निकाला गया जुलूस पूरे गांव के लिए भावुक पल बन गया। जैसे ही जुलूस गांव की गलियों से गुजरा, ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों ने अपने प्रिय प्रधानाचार्य का आत्मीय सम्मान किया। कई ग्रामीण अपने आंसू नहीं रोक सके और वातावरण भावुक हो उठा। उपस्थित लोगों का कहना था कि गांव में इस प्रकार का भव्य और जनसहभागिता से भरपूर विदाई समारोह पहली बार देखने को मिला।
समारोह में वक्ताओं ने प्रधानाचार्य स्वर्णकार के कार्यकाल को विद्यालय के लिए स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा को सेवा का माध्यम मानकर कार्य किया। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, अनुशासन, संस्कार और विद्यालय के भौतिक उन्नयन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
अपने विदाई संबोधन में मोहनलाल स्वर्णकार ने विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन और अच्छे संस्कारों के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यालय परिवार, ग्रामीणों और अभिभावकों द्वारा मिले प्रेम एवं सम्मान के लिए भावुक होकर आभार व्यक्त किया।
सेवानिवृत्ति के अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों के लिए स्नेह भोज का आयोजन कराया। साथ ही विद्यालय के विकास कार्यों के लिए 50 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान कर शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का एक और उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके इस योगदान की सभी ने मुक्तकंठ से सराहना की।
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, समाज के प्रबुद्ध नागरिकों,परिवार जन तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। विद्यालय स्टाफ ने अभिनंदन पत्र, शॉल, माल्यार्पण एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका सम्मान किया तथा भावभीनी विदाई दी।
प्रधानाचार्य मोहनलाल स्वर्णकार की यह विदाई केवल एक अधिकारी की सेवानिवृत्ति नहीं, बल्कि एक ऐसे शिक्षक के प्रति समाज की कृतज्ञता का भावपूर्ण उत्सव बन गई, जिसने अपने 36 वर्षों के सेवाकाल में शिक्षा को जीवन का सर्वोच्च धर्म मानकर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने का कार्य किया।


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