उदयपुर

कभी आखर ज्ञान की जानकारी ना रखने वाले ललिया व विकिया का सहारा बना लवीना विकास सेवा संस्थान

उदयपुर. गोगुन्दा पुलिस के प्रयास से बालको को मिला सहारा।परिवार की तरह निराश्रित बालको का बिना अनुदान के विषम परिस्थितियों में पालन करने वाला लवीना विकास सेवा संस्थान, ओंगना अधिकारियों को इतना भा गया कि जीवनज्योति निराश्रित बालगृह,सुखेर,उदयपुर से दो बालक ओंगना ट्रांसफर होकर पुलिस बनने हेतु आए है।संस्थान निदेशक भरत कुमार पूर्बिया ने बताया कि दोनों बालक सात वर्षीय ललिया व पांच वर्षीय विकिया गोगुन्दा के बाईपास स्थित प्रताप सर्कल पर पेट की भूख मिटाने हेतु भीख मांगते हुए दिखे।जिसे गोगुन्दा थानाधिकारी दलपतसिंह द्वारा एएसआई हरीसिंह राठौड़ के माध्यम से थाने में लाए गए।गोगुन्दा पुलिस द्वारा बालको की सामाजिक आर्थिक रिपोर्ट तैयार कर बालको को बाल कल्याण समिति, उदयपुर के आदेश से जीवनज्योति निराश्रित बालगृह,उदयपुर में प्रवेश मिला।परन्तु बालक ललिया व विकिया को वहा की आबोहवा रास न आई।ईधर बैंच ऑफ मजिस्ट्रेट ,उदयपुर के सदस्य राजीव मेघवाल व जिग्नेश दवे ने भी बालको की अच्छी परवरिश को ध्यान में रखते हुए बालको को लवीना विकास सेवा संस्थान के ओपन शेल्टर होम,ओंगना में स्थानांतरित कर दिया।दोनो बालक मुलतः गोगुन्दा के पास ओबरा खुर्द के है।बालको के पिता गुजरात में है और दूसरी शादी कर दी व शराबी है।बालको की मां अन्यत्र नाते चली गई।दादा दादी बुजुर्ग है एवम आर्थिक हालात खराब है।इसलिए बालक पेट भरने के लिए दाने दाने को मोहताज थे।बालको ने कभी विद्यालय की सूरत नहीं देखी।बालको को फतहपुरा चौकी से थानाधिकारी नाथूसिंह ने मुलाकात कर बालको को नाश्ता करा नए जूते पहनाए।व्यवस्थापिका प्रमीला पूर्बिया द्वारा बालको की काउंसलिंग कर स्टाफ मिठूलाल से मेडिकल कराया गया।दोनो बालक अब विद्यालय की सूरत भी देखेंगे व आखर ज्ञान भी प्राप्त करेंगे।विडंबना इस बात की है कि वर्तमान में शहर में इतने होम होते हुए भी बालको के साथ परिवार की तरह जुड़कर उनको अपना बनाने को कोई तैयार नहीं है।

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