उदयपुर

जयश्रीराम कहते हैं तो राम से बनने का संकल्प करें : साध्वी ऋतम्भरा

उदयपुर, 02 अप्रैल। ‘एक ही नारा-एक ही नाम, जयश्रीराम-जयश्रीराम’ जब यह जयघोष हम लगाते हैं तो रामजी के गुणों को भी धारण करने का संकल्प करें। हमारे राम केवट के हैं, भीलों के हैं, शबरी मैया के हैं, वे अपराजित पौरुष के धनी हैं, मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, उन्होंने धर्म को धारण किया, इसका अनुसरण हम भी करें।
यह बात दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा ने शनिवार को उदयपुर में भारतीय नववर्ष समाजोत्सव समिति व नगर निगम उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विषाल शोभायात्रा के बाद जनमैदिनी को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने धर्म को कर्तव्य से जोड़ते हुए कहा कि हमें यह समझना होगा कि हमारा धरती मां के प्रति क्या कर्तव्य है, देष के प्रति क्या कर्तव्य है, समाज के प्रति क्या कर्तव्य है, इसे समझेंगे तो राष्ट्र उन्नति के पथ पर चलेगा। उन्होंने कहा कि देष के वंचित जिन्हें बहलाया-फुसलाया जा रहा है, उनके प्रति अपने कर्तव्य को समझें।
दीदी मां ने भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अगला वर्ष षिवत्व और शुभता से परिपूर्ण होगा। जब इतनी विषाल शोभायात्रा में इतनी मातृषक्ति मंगल कलष लिए मंगलगान करें तो शुभमंगल ही होना है। हालांकि, उन्होंने महिला अत्याचारों पर पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि इस दृष्य को बदलना होगा। आज भारत की बेटी हर जगह अपना स्थान बनाए हुए है, इस नवरात्रा में कन्या का सम्मान बढ़ाएं।
उन्होंने इस आयोजन के दौरान भगवामय हुए शहर और युवाओं के जोष को देखते हुए कहा कि भगवा रंग हमें जोष के साथ होष भी सिखाता है। इसका संदेष पूरे विष्व को दें।
इससे पूर्व, तेज सिंह बांसी, राहुल मेघवाल ने दीदी मां का स्वागत किया। संघ के क्षेत्र प्रचारक प्रमुख श्रीवर्धन ने दीदी मां को स्मृति चिह्न के रूप में श्रीनाथजी की प्रतिमा भेंट की। साध्वी अमृता दीदी का स्वागत डॉ. अलका मूंदड़ा, कविता जोशी, अंजू सोनी एवं मंजू शर्मा ने किया।
मंच पर विराजित अस्थल आश्रम के महंत रासबिहारी शरण, बालाजी निरंजनी अखाड़ा फतेह स्कूल बालाजी मंदिर के महंत अमर गिरी महाराज, गुप्तेश्वर महादेव मंदिर के महंत तन्मय बन महाराज, खेड़ा मंडी आश्रम कानपुर के महंत रेवतीनाथ महाराज, उदासीन हरिहर आश्रम गुलाब बाग के महंत सुंदर दास, स्वामी चतुर्भुज हनुमान मंदिर हरिदास जी की मगरी के महंत इंद्रदेव महाराज, सर्वेश्वर धाम के महंत राधिका शरण महाराज, रामद्वारा बड़ी होली के महंत दयाराम महाराज, बापा सीताराम आश्रम के महंत राम नाथ महाराज, मेलडी माता मंदिर के महंत विरमदेव महाराज का भी हिन्दू जागरण मंच के प्रांत संगठन मंत्री रविकांत त्रिपाठी व अन्य समिति पदाधिकारियों ने स्वागत किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघ चालक व समाजोत्सव समिति के संरक्षक हेमेन्द्र श्रीमाली, महानगर संघ चालक गोविंद अग्रवाल, नगर निगम के महापौर गोविंद टाक, समिति के संयोजक विष्णु नागदा, सहसंयोजक विनोद यादव, अशोक प्रजापत, किशन सोनी आदि मंच पर उपस्थित थे। आरम्भ में संघ के विभाग प्रचारक आनंद प्रताप सिंह ने कार्यक्रम की भूमिका रखी और सभी से हरवर्ष ऐसे आयोजन के लिए जुटने का आह्वान किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक विष्णु नागदा ने किया। संचालन डॉ. भारतभूषण ओझा ने किया।

झांकियों के परिणाम
-प्रथम स्थान पर नारायण सेवा संस्थान की नवदुर्गा झांकी रही जिसे 21 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। इसी तरह, हिन्दू जागरण मंच की महापुरुषों की झांकी, वाल्मीकि समाज षिवषक्ति विकास समिति की झांकी द्वितीय स्थान पर रही। उन्हें 11-11 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। तीसरे स्थान पर झांकियों को 5100-5100 रुपये पुरस्कार दिया गया जिनमंे आयड़ बस्ती, विद्या निकेतन सेक्टर-4, ललित कला अकादमी, मारू लोहार सीकलीगर समाज, षिषु भारती, कृष्णा सेवा संस्थान की झांकियां शामिल रहीं।

खोये नौनिहाल पहुंचे मंच पर
-कार्यक्रम में कोई खोया बच्चा मंच पर पहुंचाया गया तो किसी के अभिभावकों ने परिवार को ढूंढ़ा। इनमें मोहित पुत्र रोषन लाल, सुहानी राजपूत पुत्री श्याम सिंह, किशन सोनी पुत्र रोषनलाल सोनी, गोपाल पुत्र नारायण जोषी आदि शामिल थे।

उदयपुर की अपार जनमैदिनी ने किया भारतीय नववर्ष 2079 का स्वागत-अभिनंदन
-‘राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदेमातरम, जन-जन की हुंकार वंदे मातरम’, भारत माता के प्रति सर्वस्व समर्पण के इस भाव ने भारतीय नववर्ष उदयपुर में एक नया इतिहास रच दिया। झीलों के शहर उदयपुर में भारतीय नववर्ष समाजोत्सव समिति और नगर निगम उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय नववर्ष पर पहली बार आयोजित विषाल शोभायात्रा अविस्मरणीय बन गई। इस आयोजन में उदयपुर का ऐसा कोई भी समाज नहीं रहा जो सहभागी न बना हो। शोभायात्रा की विषालता इतनी थी कि 4.47 पर पहला छोर अर्थात कलषधारी माताएं-भगिनियां स्टेडियम में प्रवेष कर चुकी थीं, जबकि शोभायात्रा के आरंभ स्थल टाउन हॉल में भी अंतिम छोर खत्म ही नहीं हुआ था। जितनी जनमैदिनी शोभायात्रा में शामिल थी, उतनी ही जनमैदिनी शोभायात्रा मार्ग में दोनों ओर उनके स्वागत मेें खड़ी थी। शाम 5.25 पर भी शोभायात्रा सूरजपोल से गुजर रही थी। कार्यक्रम में आए शहरवासियों का कहना था कि जो शोभायात्रा में थे वे सहज रूप से शोभायात्रा के साथ स्टेडियम पहुंचते गए, लेकिन जो सीधे स्टेडियम आना चाहते थे, वे जगह-जगह अटक गए। चार पहिया तो क्या दुपहिया वाहनों को भी स्टेडियम की ओर आने वाले मुख्य मार्गों से आना मुष्किल रहा, हालांकि, जिन्हें पहुंचने की ललक थी वे दूर-दूर अपने वाहन रखकर पैदल ही स्टेडियम की ओर बढ़े। शोभायात्रा इतनी लम्बी थी कि स्टेडियम में समारोह शुरू होने के बाद पौने आठ बजे जब आतिषबाजी के साथ सम्पन्न होने को था, तब तक हाथीपोल से चेतक की ओर झांकियों और युवाओं का आना जारी था। देषभक्ति के गीतों के जोष में रमे युवा नाचते-नारे लगाते स्टेडियम पहुंचे।

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