जयपुर, 10 मई। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजस्थान) की प्रदेश इकाई ने शिक्षा विभाग की नीतियों, अधिकारियों की कार्यशैली और शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि शिक्षकों के मान-सम्मान और हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष श्री रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री श्री महेंद्र कुमार लखारा एवं संघर्ष समिति संयोजक श्री संपत सिंह ने सरकार पर शिक्षकों की समस्याओं के समाधान में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लगातार संवादहीनता और अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण शिक्षकों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा
संगठन ने प्रदेशभर में आंदोलन का विस्तृत कार्यक्रम घोषित करते हुए बताया कि यदि सरकार ने शीघ्र मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। कार्यक्रम के अनुसार 14 मई को सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर उपखंड अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद 29 मई को जिला मुख्यालयों पर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा।
इसी क्रम में 5 जून को बीकानेर संभाग के शिक्षक शिक्षा निदेशालय बीकानेर पर धरना देंगे, जबकि 10 जून को जयपुर और उदयपुर संभाग के शिक्षक शिक्षा संकुल एवं सचिवालय के समक्ष प्रदर्शन करेंगे। 18 जून से राजधानी जयपुर में क्रमिक अनशन शुरू होगा तथा जुलाई में विधानसभा सत्र के दौरान प्रदेशभर के शिक्षक विधानसभा का घेराव करेंगे।
ये हैं शिक्षकों की प्रमुख मांगें
महासंघ ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। संगठन ने ग्रीष्मकालीन अवकाश में 10 दिन की कटौती को तर्कहीन बताते हुए कहा कि यदि शिक्षकों के कार्य दिवस बढ़ाए जाते हैं तो राजस्थान सेवा नियमों (RSR) के तहत उपार्जित अवकाश (PL) दिया जाना चाहिए।
संगठन ने पिछले आठ वर्षों से लंबित तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए स्पष्ट नीति बनाने, प्रबोधकों एवं अन्य श्रेणियों की वेतन विसंगतियां दूर करने तथा 33 हजार संविदा शिक्षकों को नियमित करने की मांग भी उठाई।
इसके अलावा RGHS योजना में निजी अस्पतालों द्वारा कैशलेस इलाज में आ रही परेशानियों को दूर करने और 6000 क्रमोन्नत विद्यालयों में व्याख्याता एवं प्रधानाचार्यों के रिक्त पद भरने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई।
प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने दावा किया कि प्रदेश के लगभग 4 लाख शिक्षकों में से 3 लाख शिक्षक संगठन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करना है। संघर्ष समिति संयोजक संपत सिंह ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आंदोलन और अधिक उग्र किया जाएगा।

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