. निकाय चुनाव को लेकर इन दिनों शहर की चौपालों से लेकर चाय की थड़ियों तक चर्चाओं का बाजार गर्म है। चुनावी परिणाम आने में भले ही अभी वक्त हो, लेकिन चुनाव के दौरान सामने आए कुछ राजनीतिक किस्से अभी से लोगों की जुबान पर हैं। इनमें एक किस्सा ऐसा भी है, जिसकी चर्चा नतीजों से ज्यादा निष्ठा और संगठन के प्रति समर्पण को लेकर हो रही है।
हाल ही संपन्न पालिका चुनाव के दौरान जहां टिकट नहीं मिलने पर कुछ दावेदारों ने पार्टी का दामन छोड़कर दूसरे दलों का रुख किया, वहीं कुछ स्थानों पर टिकट कटने के बाद विरोध और भीतरघात के स्वर भी सुनाई दिए। ऐसे माहौल में वार्ड 19 का एक युवा कार्यकर्ता इसके बिल्कुल विपरीत उदाहरण के रूप में सामने आया।
दरअसल, वार्ड 19 से भाजपा के एक युवा कार्यकर्ता की पत्नी पार्टी की ओर से टिकट की सशक्त दावेदार मानी जा रही थीं। उम्मीद भी थी कि पार्टी उन्हें मैदान में उतारेगी, लेकिन ऐन वक्त पर टिकट किसी अन्य दावेदार को दे दिया गया। टिकट की घोषणा के बाद स्वाभाविक रूप से वार्ड की राजनीतिक फिजा में हलचल हुई और कई पार्टी नेता भी इस स्थिति को लेकर असहज नजर आए।
लेकिन टिकट से वंचित हुए परिवार ने जिस तरह स्थिति को संभाला, उसने कई लोगों को चौंका दिया। संबंधित कार्यकर्ता ने पार्टी नेतृत्व के सामने साफ संदेश दिया कि “टिकट किसी को भी मिले, मैं पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता हूं, संगठन के साथ खड़ा हूं।”
बस फिर क्या था। वार्ड 19 के युवा कार्यकर्ता भी इस निष्ठा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए। टिकट का मलाल पीछे छूटा और संगठन का काम आगे आ गया। मतदान के दिन तक युवाओं की टीम ने पूरी ताकत के साथ मोर्चा संभाले रखा। घर-घर संपर्क से लेकर मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने और मतदान प्रतिशत बढ़ाने तक, युवाओं ने जिस एकजुटता से काम किया, उसकी चर्चा पूरे नगर में होने लगी।
बताया जाता है कि वार्ड में मतदान प्रतिशत 92 प्रतिशत के आसपास पहुंचाने के बाद ही युवा कार्यकर्ताओं की इस टीम ने राहत की सांस ली। चुनावी राजनीति में जहां टिकट को लेकर अक्सर नाराजगी संगठनात्मक अनुशासन पर भारी पड़ जाती है, वहीं वार्ड 19 में युवाओं ने यह संदेश देने की कोशिश की कि व्यक्ति से बड़ा संगठन और पद से बड़ी पार्टी के प्रति निष्ठा होती है।
सबसे खास बात यह रही कि वार्ड 19 के युवा कार्यकर्ताओं ने न केवल पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई, बल्कि अपने टीमवर्क और आपसी एकजुटता का भी परिचय दिया। चुनावी मैदान में यह एकजुटता अपने आप में चर्चा का विषय बन गई।
अब चुनाव परिणाम किसके पक्ष में जाता है, यह तो आने वाला समय बताएगा। जीत-हार का फैसला मतपेटियों से होगा, लेकिन वार्ड 19 के युवाओं ने चुनाव परिणाम से पहले ही निष्ठा, अनुशासन और समर्पण की एक अलग कहानी जरूर लिख दी है।
चौपाल पर चर्चा यही है—टिकट भले ही किसी एक को मिला हो, लेकिन वार्ड 19 में संगठन की जीत के लिए युवाओं ने जिस तरह कंधे से कंधा मिलाया, उसने हर किसी को अपना कायल कर दिया।
– संपादकीय डेस्क –
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