
फतहनगर (www.fatehnagarnews.com)। मंगलवार को महाराणा प्रताप क्षत्रिय संस्थान द्वारा यूजीसी कानून के विरोध में उप तहसीलदार को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन के माध्यम से कहा गया है कि यूजीसी अधिनियम 2020 संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में निहित समानता के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। यह कानून सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार की भावना के विपरीत है और समाज में विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देता है।
इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत सामान्य वर्ग के नागरिकों को बिना किसी प्राथमिक जांच के दोषी ठहराया जा सकता है। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इस कानून में झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की कोई कठोर व्यवस्था नहीं है, जिससे निर्दोष नागरिकों के सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
इस अधिनियम में केवल नियत को आधार बनाकर मुकदमा दर्ज करने की शक्ति दी गई है। इससे यह कानून एक प्रकार का “अंधा कानून” बन जाता है, जिसका दुरुपयोग विद्वेष और उत्पीड़न के लिए किया जा सकता है।
महाराणा प्रताप क्षत्रिय संस्थान ने चेतावनी दी कि इस तरह के विभाजनकारी कानून से जातिगत भेदभाव और सामाजिक वैमनस्य में वृद्धि होगी। यह देश की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
ज्ञापन के जरिए निवेदन किया गया है कि अपने संवैधानिक विशेषाधिकारों का प्रयोग करते हुए इस यूजीसी अधिनियम 2020 को पूर्णतः वापस लेने के लिए सरकार को निर्देशित करें। संगठन का कहना है कि देश का क्षत्रिय समाज और प्रबुद्ध वर्ग राष्ट्रपति से न्याय की अपेक्षा करता है।
इस इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष फतह सिंह राणावत बंगला, महामंत्री रायसिंह चुण्डावत खेड़ी, संरक्षक भोम सिंह चुण्डावत खेड़ी, पर्वत सिंह नया बंगला, भेरू सिंह चौहान, अभय सिंह चौहान, डूंगर सिंह राणावत, महेंद्र सिंह झाला, करणी सेना जिला संयोजक भगवत सिंह राठौड़, बादलदेव सिंह राणावत, लक्ष्मण सिंह चौहान, भगवत सिंह गौड़, जोधसिंह चुण्डावत, राम सिंह चुण्डावत, हेमेंद्र सिंह सिकराणी, करण सिंह गौड़, पूरन सिंह राणावत, करण सिंह सिसोदिया, महेंद्र सिंह राणावत, कुबेर सिंह राठौड़, देवेन्द्र सिंह व समाज के गणमान्य जन उपस्थित थे।
