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आकोला का मत्स्या तालाब पिकनिक स्पॉट बन सकता है ‌

(नवरतन जैन ) ।

चित्तौड़गढ़ जिले का आकोला अब कोई छोटा गांव नही रहा है बल्कि आबादी के तेजी से बढ़ने से यह एक बडे कस्बे का रुप ले चुका है। हाल ही के सालों में आकोला का व्यापारिक दृष्टि से भी काफी विस्तार हुआ है । इसको देखते हुए यहां मनोरंजन की सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता महसूस होने लगी है। इसके लिए कस्बे में बेडच नदी के दुसरे छोर पर स्थित मत्स्या तालाब पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किया जा सकता है। इस संबंध में ग्राम पंचायत को पहल करनी चाहिए। यह तालाब कस्बे के पास ही है और चारों ओर से यहां पहुंचा जा सकता है। विशाल क्षैत्र में फैले इस तालाब का नजारा देखते ही बनता है ‌और जब यह तालाब पानी से पुरा भरा होता है तो इसका खूबसूरत प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। दशकों पुराना यह तालाब अतीत में कस्बे के लिए बहुत ही उपयोगी रहा है और आज भी है। सैकड़ो मवेशी चारे पानी की जुगाड में तालाब पेटे में विचरण करते हैं। लोगों का कहना है कि तालाब पेटा काफी बड़ा और फैलाव लिए हुए है। इसके उपरी एक हिस्से में गार्डन विकसित किया जा सकता है जहां कुछ मनोरंजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके अलावा तालाब की पाल सहित चहुंओर भारी प्रकाश वाली दुधिया रोशनी की लाइटें भी लगाई जा सकती है। लोगों का तो यहां तक कहना है कि तालाब में स्टीमर यानि कि नाव भी पर्याप्त पानी होने पर चलाई जा सकती है। इससे कस्बावासियों को एक अच्छा पिकनिक स्पॉट मिल सकता है जहां वे मनोरंजन के कुछ पल यहां के शांत चित्त वातावरण में बिता सकें। लोगों का मानना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की यदि इच्छा शक्ति हो तो यह तालाब रमणीक स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। तालाब के पानी में जल क्रीड़ा करने बड़ी संख्या में पक्षी भी यहां आते हैं। सालों पहले तालाब में कमल की कुछ खेती होती थी। एक जमाने में यहां नहाने धोने वालो का जमघट लगा रहता था। रंगाई छपाई उद्योग में भी इस तालाब की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। सांसद और विधायक निधि से भी इस तालाब का रमणीक स्थल के रूप में कायाकल्प किया जा सकता है।

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