फतहनगर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने राज्य के शिक्षामंत्री को ज्ञापन सौंपकर शिविरा पंचांग 2026-27 में तत्काल संशोधन की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि निदेशालय बीकानेर द्वारा 31 मार्च 2026 को जारी शिविरा पंचांग शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के हितों के प्रतिकूल है।
ज्ञापन के अनुसार, संगठन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच हुई वार्ता में जिन तीन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन्हें अंतिम पंचांग में नजरअंदाज कर दिया गया है। विशेष रूप से ग्रीष्मावकाश में कटौती कर 17 मई से 20 जून तक सीमित कर दिया गया है, जबकि पूर्व में 30 जून तक अवकाश रहता था। संगठन का कहना है कि यह निर्णय राजस्थान सेवा नियमों के विपरीत है और इससे शिक्षकों के अवकाश अधिकार प्रभावित होंगे।
महामंत्री लखारा ने बताया कि यदि ग्रीष्मावकाश में कटौती की जाती है, तो अन्य विभागों की भांति शिक्षकों को 30 पी.एल. (प्रिविलेज लीव) प्रदान की जानी चाहिए। साथ ही, गर्मी के प्रकोप को देखते हुए विद्यालयों का प्रातःकालीन समय 1 अप्रैल के बजाय 1 मार्च से लागू करने का आश्वासन भी पूरा नहीं किया गया।
इसके अलावा, प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वर्ष में दिए जाने वाले 2 अधिकृत अवकाशों को घटाकर 1 कर दिया गया है, जिससे भी असंतोष व्याप्त है।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि उक्त मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए विवश होना पड़ेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।
संगठन ने शिक्षामंत्री से मांग की है कि ग्रीष्मावकाश 17 मई से 30 जून तक यथावत रखा जाए या वैकल्पिक रूप से पी.एल. प्रदान की जाए, प्रातःकालीन समय 1 मार्च से लागू किया जाए तथा प्रधानाध्यापक द्वारा घोषित 2 अवकाश पूर्ववत बहाल किए जाएं।
