
आज के राजभोग दर्शन में प्रभु के अद्भुत और अलौकिक स्वरूप के दर्शन हुए। कीर्तन (राग – आसावरी) में भक्त कवि सूरदास जी द्वारा वर्णित भगवान की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण गान किया गया। कीर्तन में प्रभु की उस अनोखी लीला का वर्णन है, जिसमें तीनों लोकों के स्वामी बाल रूप में व्रज में क्रीड़ा करते दिखाई देते हैं।
कीर्तन के पदों में बताया गया कि जिन प्रभु का स्मरण देव, मुनि और ब्रह्मा तक करते हैं, वही बाल स्वरूप में माता यशोदा के स्नेह में बंधे नजर आते हैं। प्रह्लाद की रक्षा करने वाले, गजराज की पुकार सुनने वाले वही प्रभु व्रज गोपियों के संग नृत्य करते हुए अत्यंत मनोहर प्रतीत होते हैं।
साज एवं सजावट:
आज श्रीजी में पीले मलमल की रुपहली ज़री की किनारी युक्त सुंदर पिछवाई सजाई गई। गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण पवित्र और शांतिमय बना रहा।
वस्त्र:
प्रभु को पीले मलमल का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धारण करवाया गया, जो रुपहली ज़री की किनारी से सुसज्जित थे। ठाड़े वस्त्र लाल रंग के धारण कराए गए, जो पीले परिधान के साथ अत्यंत आकर्षक लगे।
श्रृंगार:
आज श्रीजी को कमर तक माणक (माणिक्य) के आभूषणों से अलंकृत किया गया। श्रीमस्तक पर पीले रंग की गोल पाग के साथ सिरपैंच, दोहरा कतरा एवं बाईं ओर शीशफूल धारण कराया गया। श्रीकर्ण में कर्णफूल की जोड़ी सुशोभित रही।
चैत्र मास के अनुरूप गुलाब के पुष्पों की दो सुंदर मालाएं अर्पित की गईं। श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, श्याम मीना की वेणुजी एवं एक वेत्रजी धारण कराए गए।
इस प्रकार आज के राजभोग दर्शन में प्रभु का स्वरूप भक्तों के लिए अत्यंत मनमोहक और भावविभोर करने वाला रहा।
