पांच वार्डों में कांटे का मुकाबला, 25 सीटों पर 65 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला आज
फतहनगर। फतहनगर-सनवाड़ नगर पालिका चुनाव के मतदान के बाद अब सोमवार को होने वाली मतगणना को लेकर शहर में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। 25 वार्डों में हुए चुनाव में कुल 65 प्रत्याशी मैदान में थे। मतदान के बाद अब प्रत्याशियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के समर्थक भी अपने-अपने स्तर पर मतदान के रुझानों और वार्डवार समीकरणों का आकलन कर रहे हैं।
शहर में चल रही जनचर्चा और राजनीतिक आकलनों के अनुसार भाजपा को करीब 11 वार्डों में बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि कांग्रेस के खाते में 8 सीटें जाने की चर्चा है। एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी की स्थिति मजबूत बताई जा रही है। वहीं शेष पांच वार्डों में मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है, जहां मतगणना के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होने की संभावना है। हालांकि ये आंकड़े केवल मतदान के बाद चल रहे स्थानीय आकलन हैं और वास्तविक परिणाम मतगणना के बाद ही सामने आएंगे।
पांच वार्डों में परिणाम पर टिकी नजर
चुनाव परिणाम को लेकर सबसे अधिक उत्सुकता उन पांच वार्डों को लेकर है, जहां भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। इन वार्डों में कम अंतर से हार-जीत होने की संभावना को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों के समर्थक मतगणना के परिणाम को लेकर खासे उत्सुक हैं।
पालिका की सत्ता का गणित भी इन पांच सीटों के परिणाम से प्रभावित हो सकता है। यदि अनुमान के अनुरूप भाजपा 11, कांग्रेस 8 और निर्दलीय एक सीट पर जीत दर्ज करती है तो शेष पांच वार्ड निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
भाजपा के सामने दिग्गजों की सीट बचाने की चुनौती
इस चुनाव में भाजपा के सामने जहां सत्ता बरकरार रखने की चुनौती है, वहीं पार्टी के कुछ दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार कुछ ऐसे वार्ड हैं जहां पार्टी के प्रभावशाली नेताओं से जुड़े प्रत्याशियों को इस बार कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है। ऐसे में परिणाम सामने आने के बाद यह भी देखा जाएगा कि भाजपा के प्रमुख नेताओं का अपने-अपने क्षेत्रों में कितना प्रभाव रहा।
चुनाव के दौरान कई वार्डों में टिकट वितरण को लेकर कार्यकर्ताओं एवं संभावित दावेदारों में असंतोष की चर्चाएं भी सामने आई थीं। कुछ स्थानों पर टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों के चुनाव मैदान में उतरने तथा पार्टी के भीतर मतभेद की स्थिति बनने की बात भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय रही।
कई वार्डों में भीतरघात की चर्चा
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के कई वार्डों में भीतरघात की चर्चाएं भी सुनने को मिलीं। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने कुछ स्थानों पर पार्टी से जुड़े लोगों अथवा टिकट के दावेदारों के समर्थकों द्वारा खुलकर या अप्रत्यक्ष रूप से विरोध किए जाने की चर्चाएं रहीं।
अब मतगणना के बाद यह साफ होगा कि इन आंतरिक मतभेदों का चुनाव परिणाम पर कितना असर पड़ा। यदि पार्टी के कई प्रत्याशी अपेक्षा के विपरीत चुनाव हारते हैं तो इसके पीछे स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी, टिकट वितरण तथा भीतरघात जैसे मुद्दों की समीक्षा होना तय माना जा रहा है।
टिकट वितरण बना चर्चा का केंद्र
पालिका चुनाव में भाजपा के टिकट वितरण को लेकर भी चुनाव से पहले और चुनाव प्रचार के दौरान चर्चाएं रही थीं। कई दावेदारों द्वारा लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने के बावजूद टिकट नहीं मिलने से नाराजगी की बात सामने आई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनाव में प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़, परिवार एवं समाज का समर्थन और वार्ड स्तर के समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में टिकट वितरण में थोड़ी सी चूक भी परिणाम को प्रभावित कर सकती है।
यदि चुनाव परिणाम भाजपा के अनुमान के अनुरूप नहीं आते हैं तो पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की नाराजगी और टिकट वितरण में कथित मनमानी जैसे मुद्दे प्रमुख कारणों के रूप में सामने आ सकते हैं। वहीं भाजपा यदि अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन करती है तो पार्टी संगठन की रणनीति और प्रत्याशियों के पक्ष में बने स्थानीय समीकरणों को इसकी वजह माना जाएगा।
कांग्रेस के लिए भी परीक्षा की घड़ी
दूसरी ओर कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव स्थानीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की परीक्षा माना जा रहा है। कांग्रेस ने कई वार्डों में स्थानीय और मजबूत चेहरों को मैदान में उतारकर भाजपा को चुनौती देने का प्रयास किया। मतदान के बाद कांग्रेस समर्थकों द्वारा भी कई वार्डों में अपने प्रत्याशियों की जीत के दावे किए जा रहे हैं।
अब सोमवार की मतगणना में सामने आने वाले परिणाम ही यह तय करेंगे कि मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में भरोसा जताया है या कांग्रेस स्थानीय सत्ता में वापसी करने में सफल होती है।
निर्दलीय भी बन सकते हैं निर्णायक
एक ओर दोनों प्रमुख दल बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अपने-अपने दावे कर रहे हैं, वहीं निर्दलीय प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। यदि परिणाम त्रिशंकु स्थिति में जाता है तो निर्दलीय पार्षद पालिका में बोर्ड गठन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल चुनाव परिणाम को लेकर शहर में चाय की थड़ियों से लेकर राजनीतिक बैठकों तक वार्डवार चर्चाओं का दौर जारी है। प्रत्याशियों के समर्थक अपने-अपने गणित के आधार पर जीत के दावे कर रहे हैं। लेकिन इन सभी कयासों पर सोमवार को मतगणना के साथ विराम लगेगा और 25 वार्डों के 65 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला सामने आएगा।

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