उदयपुर। मेवाड़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मनारायण जोशी ने गुलाबचंद कटारिया को संबोधित करते हुए एक विस्तृत खुला पत्र जारी कर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पत्र में जोशी ने कटारिया के राजनीतिक, संगठनात्मक और संवैधानिक आचरण पर सवाल खड़े करते हुए कई पुराने घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया है।
पत्र की पृष्ठभूमि में पार्षद डॉ. विजय विप्लवी द्वारा राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र का जिक्र करते हुए जोशी ने कहा कि उस मुद्दे पर तथ्यात्मक जवाब देने के बजाय कटारिया ने व्यक्तिगत आरोप लगाए, जो न केवल भ्रामक हैं बल्कि विषय से ध्यान भटकाने का प्रयास भी है।
चुनाव और टिकट को लेकर आरोप
जोशी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि 2008, 2013 और 2018 के विधानसभा चुनावों में कटारिया की भूमिका उनके खिलाफ रही। उन्होंने दावा किया कि 2013 में उनका टिकट कटवाने में कटारिया की प्रमुख भूमिका थी, जबकि 2018 में भी अनिच्छा के बावजूद सहमति दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन में स्वयं को निर्णायक मानने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है।
संगठन में हस्तक्षेप और भीतरघात के आरोप
पत्र में जोशी ने कटारिया पर संगठन में हस्तक्षेप, खेमेबंदी और भीतरघात के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न चुनावों और संगठनात्मक निर्णयों में कटारिया और उनके समर्थकों ने कई बार पार्टी हितों के विपरीत कार्य किए। राजसमंद जिला प्रमुख उपचुनाव में क्रॉस वोटिंग, प्रदेश कार्यसमिति बैठकों का बहिष्कार और नेताओं के खिलाफ विरोध जैसे मामलों का भी उल्लेख किया गया।
वित्तीय अनियमितता और षड्यंत्र का दावा
जोशी ने वर्ष 1998 के चुनाव फंड से जुड़ा एक प्रसंग उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें वित्तीय रूप से फंसाने का प्रयास किया गया। हालांकि उन्होंने दावा किया कि समय रहते राशि जमा करवाकर उन्होंने इस कथित षड्यंत्र को विफल कर दिया।
राज्यपाल पद की मर्यादा पर सवाल
वर्तमान में पंजाब के राज्यपाल पद पर आसीन कटारिया पर जोशी ने संवैधानिक मर्यादा के उल्लंघन के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि उदयपुर में बार-बार जनसुनवाई करना, स्थानीय प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रियता राज्यपाल पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
गौहाटी यात्रा व्यय को लेकर आरोप
जोशी ने फरवरी 2023 में राज्यपाल शपथ ग्रहण के दौरान समर्थकों की गौहाटी यात्रा का खर्च उदयपुर जिले के चार विधायकों के यात्रा मद से वहन किए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने इसे नैतिकता के विरुद्ध बताते हुए इसकी जांच की मांग की।
अन्य आरोप और सवाल
पत्र में जोशी ने भूमि प्रकरण, संगठन में गुटबंदी, नेताओं के अपमान, और विभिन्न राजनीतिक निर्णयों में कथित दोहरे व्यवहार जैसे कई मुद्दों को उठाया। साथ ही उन्होंने कटारिया से उनके दौरों, जनसुनवाई और प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर सार्वजनिक जवाब देने की मांग की।
निष्कर्ष
पत्र के अंत में जोशी ने कटारिया से आत्ममंथन करने और उठाए गए सवालों पर स्पष्ट जवाब देने की अपील की। इस खुले पत्र के सामने आने के बाद मेवाड़ सहित प्रदेश की राजनीति में चर्चा का माहौल गर्म हो गया है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है।
