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जेवाणा में गूंजा सनातन का शंखनाद, हजारों हिंदुओं की एकजुटता से विराट हिंदू सम्मेलन बना शक्ति-प्रदर्शन

कलश यात्रा से लेकर धर्मसभा तक प्रखर हिंदुत्व का उद्घोष,  संतों के ओजस्वी प्रवचनों में हिंदू एकता, गौ-रक्षा और राष्ट्र-सुरक्षा का संकल्प
 फतहनगर।  मावली उपखंड के अंतर्गत ग्राम जेवाणा में रविवार को आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने न केवल धार्मिक आयोजन की सीमाओं को पार किया, बल्कि यह कार्यक्रम सनातन चेतना, हिंदू एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक सशक्त शक्ति-प्रदर्शन बनकर उभरा। विगत 15 से 20 दिनों से की जा रही सुनियोजित तैयारियों के परिणामस्वरूप यह आयोजन संपूर्ण क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणास्पद सिद्ध हुआ।इस विराट आयोजन में जेवाणा मंडल के लोपड़ा, भावली, अमृतपुरा, सवानिया और स्वरूपपुरा सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों की संख्या में सनातन धर्मावलंबी शामिल हुए। आयोजन में प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक आयु और प्रत्येक जाति के हिंदुओं की सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिंदू समाज अब जातिगत बंधनों से ऊपर उठकर एक संगठित सांस्कृतिक शक्ति के रूप में आगे बढ़ रहा है।कलश यात्रा से प्रारंभ हुआ सनातन चेतना का उत्सव: विराट हिंदू सम्मेलन के उपलक्ष्य में प्रातः 11 बजे ग्राम के आराध्य देव चारभुजा नाथ मंदिर से भव्य कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ। सैकड़ों की संख्या में मातृशक्ति पारंपरिक परिधान में सिर पर कलश धारण कर धर्मध्वज के साथ आगे बढ़ती दिखाई दी। यह दृश्य न केवल आस्था का प्रतीक था, बल्कि हिंदू समाज की सांस्कृतिक शक्ति और अनुशासन का जीवंत प्रदर्शन भी था।ग्राम के मुख्य मार्गों से होकर निकली इस कलश यात्रा के दौरान संपूर्ण जेवाणा गांव भगवा ध्वजों, धार्मिक पोस्टरों, बैनरों और आकर्षक स्वागत द्वारों से सुसज्जित रहा। पुष्पवर्षा के साथ भक्ति और राष्ट्र भक्ति के गीतों गूंजते मार्ग, गगनभेदी जयघोष और शंखनाद ने पूरे वातावरण को सनातन ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया।संतों के दिव्य दर्शन और झांकियों में हिंदुत्व का जीवंत स्वरूप :कलश यात्रा के दौरान देश-धर्म के प्रति समर्पित साधु-संतों के दुर्लभ दर्शन श्रद्धालुओं को प्राप्त हुए। पीठाधीश्वर श्री मुंगाना धाम, सांवलिया जी के महंत श्री अनुज दास महाराज, पंचदशनाम जूना अखाड़ा के दिगंबर श्री राजपुरी महाराज, काली कल्याणी शक्तिपीठ के गादीपति महंत श्री कुलदीप सिंह चौहान तथा श्रृंग ऋषि आश्रम विकरणी के महंत श्री मोहन भारती महाराज ने बगिया में विराजमान होकर ग्रामवासियों को आशीर्वाद प्रदान किया।यात्रा में राम, लक्ष्मण, सीता, जामवंत जैसे पौराणिक चरित्रों की झांकियों के साथ चंद्रशेखर आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस, जीजाबाई जैसे राष्ट्रनायकों की झांकियों ने यह संदेश दिया कि हिंदुत्व केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की चेतना है।रावला बाग में धर्मसभा, हिंदू चेतना का महासंगम:कलश यात्रा के पश्चात रावला बाग परिसर में विराट धर्मसभा का आयोजन किया गया। दोपहर 1:30 बजे विशाल पंडाल में धर्म सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। मंच पर संतों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, चित्तौड़ प्रांत के महाविद्यालय विद्यार्थी कार्य प्रमुख श्री आनंद प्रताप सिंह, मातृशक्ति के रूप में बहन हिमानी उपस्थित रहीं। मंच संचालन माधव लाल गाडरी ने किया।महंत अनुज दास जी का प्रखर उद्घोष–‘हिंदू जागेगा तभी राष्ट्र बचेगा’।धर्मसभा को संबोधित करते हुए महंत श्री अनुज दास महाराज ने हिंदू समाज की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने जातिवाद, छुआछूत और सामाजिक विघटन से ऊपर उठकर संगठित हिंदू शक्ति बनने का आह्वान किया। उन्होंने स्वधर्म पालन, बच्चों को धर्म एवं आध्यात्म से जोड़ने तथा हिंदू परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर बल दिया।उन्होंने लव जिहाद, लैंड जिहाद और जनसंख्या असंतुलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हिंदू समाज समय रहते नहीं जागा, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। गौ-हत्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने 27 अप्रैल 2026 को गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने हेतु देशव्यापी ज्ञापन आंदोलन का आह्वान किया।वीरता, संस्कृति और शक्ति का संदेश :महंत श्री कुलदीप सिंह चौहान ने भारत के धर्मवीरों और राष्ट्रनायकों के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया तथा आदिशक्ति मां कल्याणी के मंत्र के साथ अपनी वाणी को विराम दिया।संघ प्रचारक आनंद प्रताप सिंह के ओजस्वी वक्तव्य से धर्मसभा में राष्ट्र और स्वधर्म का जागरण: विराट हिंदू सम्मेलन की धर्मसभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक श्री आनंद प्रताप सिंह ने प्रभावशाली एवं ओजस्वी वक्तव्य देकर उपस्थित जनमानस को स्वधर्म और स्वराष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के लिए जागृत किया।अपने संबोधन में श्री आनंद प्रताप सिंह ने भारत के महान क्रांतिकारियों और महापुरुषों के जीवन वृतांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण का आधार त्याग, समर्पण और कर्तव्यबोध है। उन्होंने समाज को अपने आचरण और विचारों के माध्यम से राष्ट्रहित में योगदान देने का संदेश दिया।उन्होंने राष्ट्र की समकालीन सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए उनके समाधान हेतु समाज में ‘पंच परिवर्तन’ को आवश्यक बताया। उनके वक्तव्य ने धर्मसभा में उपस्थित जनमानस में संगठन, अनुशासन और राष्ट्रचेतना की भावना को सुदृढ़ किया।मातृशक्ति के रूप में बहन हिमानी ने विदुषी गार्गी के उदाहरण से नारी शक्ति को जागृत करने का संदेश दिया।महाप्रसादी और भजन संध्या में उमड़ा जनसैलाब: धर्मसभा के पश्चात 7 से 8 हजार श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की। सायंकालीन समय में लोकभजन गायक धनराज जोशी की भजन संध्या ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।सर्व हिंदू समाज की एकजुटता का ऐतिहासिक उदाहरण:यह आयोजन किसी एक वर्ग या जाति तक सीमित न रहकर सर्व हिंदू समाज का प्रतीक बना। ग्राम जेवाणा के लिए यह सम्मेलन ऐतिहासिक, अभूतपूर्व और प्रेरणास्पद रहा, जिसकी व्यापक चर्चा मीडिया एवं सोशल मीडिया पर हो रही है।

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