Home>>फतहनगर - सनवाड>>जयपुर बर्ड फेस्टिवल का भव्य समापन,रविवार को आर्द्रभूमियों से हुआ सीधा संवाद
फतहनगर - सनवाड

जयपुर बर्ड फेस्टिवल का भव्य समापन,रविवार को आर्द्रभूमियों से हुआ सीधा संवाद

सांभर–नालियासर,मेनार में परिंदों की दुनिया से रूबरू हुए पक्षीप्रेमी

जयपुर, 1 फरवरी। जयपुर बर्ड फेस्टिवल–2026 के दूसरे दिन रविवार को प्रतिभागियों ने प्रदेश की प्रमुख आर्द्रभूमियों का फील्ड विजिट कर प्रकृति और परिंदों से सीधा संवाद स्थापित किया। फेस्टिवल के अंतर्गत सांभर साल्ट लेक, नालियासर, बरखेड़ा–चंदलाई–मुहाना क्षेत्र, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर), तालछापर अभयारण्य (चूरू) और मेनार जैसे महत्वपूर्ण वेटलैंड्स में बर्ड वॉचिंग गतिविधियां आयोजित की गईं।
रविवार को आयोजित इस फील्ड विजिट में पद्मश्री सम्मानित फोटोग्राफर अनूप साह, ग्रीन पीपल सोसायटी के अध्यक्ष राहुल भटनागर, प्रतापसिंह चूंडावत, पक्षी विशेषज्ञ वीरेंद्र सिंह बेड़सा, निर्मल मेनारिया, बटरफ्लाई एक्सपर्ट मुकेश पंवार, पुष्पा खमेसरा, शरद श्रीवास्तव, बाशोबी भटनागर सहित अनेक पक्षीप्रेमी और पर्यावरणविद् शामिल हुए।

सांभर झील के मध्य तक पहुंची ‘बग्गी ट्रेन’
प्रतिभागियों ने नालियासर और सांभर साल्ट लेक का भ्रमण किया। सांभर झील के मध्य क्षेत्र तक पहुंचने के लिए छोटी ट्रेननुमा ‘बग्गी’ का उपयोग किया गया, जहां स्थानीय गाइड के अनुसार झील क्षेत्र में 20 हजार से अधिक पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई। विशाल झील में हजारों पक्षियों को एक साथ विचरण करते देख प्रतिभागी अभिभूत नजर आए।

वेटलैंड्स पर पक्षियों की अद्भुत विविधता
फील्ड विजिट के दौरान सांभर और नालियासर वेटलैंड्स पर 50 से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे गए। इनमें प्रमुख रूप से पाइड एवोसेट, नॉर्दर्न शोवलर, पिंटेल, स्पूनबिल, रेडशैंक, सैंडपाइपर, कॉमन कूट, मूरहेन, लिटिल ग्रीब, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, लिटिल रिंग्ड प्लोवर, वुड सैंडपाइपर, ग्रीन सैंडपाइपर, स्पॉट-बिल्ड डक, नॉब-बिल्ड डक, गल, फ्लेमिंगो, ग्रे हेरॉन, रिवर टर्न, किंगफिशर, गैडवाल, डार्टर, लार्ज कॉरमोरेंट, पेलिकन सहित अनेक प्रजातियां शामिल रहीं।
इसके अलावा व्हीटिअर, स्टोनचैट, येलो वैगटेल, वैगटेल, क्रेस्टेड लार्क, व्हिस्कर्ड बुलबुल, बार्न स्वैलो, वायर-टेल्ड स्वैलो, प्लोवर, इंटरमीडिएट इग्रेट, रॉक चैट, रेड कॉलर्ड डव, ग्रेटर कूकाल, ड्रोंगो, व्हाइट-बेलीड ड्रोंगो, इंडियन रोलर, ग्रेलेग गूज, बार-हेडेड गूज, रुडी शेलडक, किंगफिशर (पाइड एवं व्हाइट-थ्रोटेड), कौआ और रॉक पिजन जैसे पक्षी भी देखे गए।
संरक्षण का जीवंत संदेश
विशेषज्ञों ने बताया कि सांभर और नालियासर जैसी आर्द्रभूमियां प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आवास हैं। हजारों पक्षियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि यदि संरक्षण और संतुलित प्रबंधन किया जाए तो वेटलैंड्स जैव विविधता का मजबूत आधार बन सकते हैं।

फील्ड विजिट के दौरान प्रतिभागियों ने पक्षियों के व्यवहार, भोजन, प्रवास और आवास संबंधी विशेषताओं को नजदीक से समझा।

जयपुर बर्ड फेस्टिवल में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

रेप्टर्स, आउल और वेटलैंड्स संरक्षण पर हुआ गंभीर विमर्श

जयपुर, 1 फरवरी। ग्रीन पीपल सोसायटी, जयपुर चैप्टर द्वारा राजस्थान सरकार के वन विभाग एवं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सहयोग से आयोजित जयपुर बर्ड फेस्टिवल–2026 के तहत कानोता कैंप रिजॉर्ट, जामडोली में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रख्यात पक्षी विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की। कार्यशाला में पक्षियों—विशेषकर रेप्टर्स और आउल—के संरक्षण के साथ-साथ देश और प्रदेश की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) की चुनौतियों पर गहन विचार–विमर्श हुआ।

वेटलैंड्स पर पैनल डिस्कशन

वेटलैंड्स विषय पर आयोजित पैनल डिस्कशन को संबोधित करते हुए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ पक्षीविद् डॉ. असद रहमानी ने अमृत सरोवर योजना की जानकारी देते हुए उसमें मौजूद कुछ विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूरे देश में वेटलैंड्स संकट की स्थिति में हैं और इनके संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास आवश्यक हैं।
राजस्थान वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य एवं एनसीटीए के पूर्व सदस्य राजपाल सिंह ने वेटलैंड्स को हो रही क्षति के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अतिक्रमण, पानी की कमी और अनियमित पर्यटन गतिविधियां वेटलैंड्स के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से सांभर लेक सहित अन्य वेटलैंड्स पर पर्यटन के दुष्प्रभावों की चर्चा की और संरक्षण के लिए स्पष्ट एसओपी बनाए जाने की आवश्यकता जताई। साथ ही उन्होंने उदयपुर के मेनार, किशन करेरी और बड़वई क्षेत्रों में ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयासों की सराहना की।

समाज में सकारात्मक बदलाव की जरूरत :

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सीईओ रवि सिंह ने जयपुर बर्ड फेस्टिवल के सफल आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज में पॉजिटिव चेंज लाने की जरूरत है और बर्ड फेस्टिवल जैसे आयोजन इस दिशा में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने पर्यावरण और संरक्षण विषयों पर छोटे–छोटे प्रबुद्ध समूहों के संवाद को समय की आवश्यकता बताया।

सांभर लेक और पर्यटन प्रबंधन पर जोर

चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन (केसीए) अरुण प्रसाद ने सांभर लेक के संदर्भ में बताया कि वहां वन विभाग का कोई प्रत्यक्ष क्षेत्र नहीं है, लेकिन पक्षियों की उपस्थिति के कारण यह विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का केंद्र बनता है। उन्होंने बीते वर्षों में बर्ड फ्लू की स्थितियों में किए गए संरक्षण प्रयासों की जानकारी दी और पर्यटन प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया।

पुस्तक का विमोचन :

कार्यशाला के दौरान रेप्टर्स एक्सपर्ट रातुल शाह की पुस्तक “Falcons of India” का विमोचन किया गया। अपने प्रेजेंटेशन में शाह ने बताया कि भारत में रेप्टर्स की कुल 108 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 60 से अधिक प्रजातियां राजस्थान में मौजूद हैं। उन्होंने रेप्टर्स की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए इनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

आउल पर वैज्ञानिक जानकारी:

आउल एक्सपर्ट डॉ. प्राची मेहता ने उल्लुओं पर आधारित प्रस्तुति देते हुए बताया कि विश्व में आउल की 240 प्रजातियां, जबकि भारत में 36 प्रजातियां पाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि आउल अंटार्कटिका को छोड़कर लगभग सभी महाद्वीपों में पाए जाते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अधिकांश प्रजातियों में मादा आउल का आकार नर से बड़ा होता है। अपने व्याख्यान में उन्होंने उल्लुओं की जीवन शैली, व्यवहार और पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

फोटोग्राफी से संरक्षण का संदेश :
नैनीताल से आए पद्मश्री सम्मानित फोटोग्राफर अनूप शाह ने बर्ड्स एवं पर्यावरण फोटोग्राफी के व्यावहारिक टिप्स साझा किए। उन्होंने अपने दीर्घकालिक अनुभवों के माध्यम से बताया कि फोटोग्राफी किस प्रकार संरक्षण का सशक्त माध्यम बन सकती है।

कार्यशाला का संचालन वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. सतीश शर्मा ने किया। समापन सत्र के प्रारंभ में ग्रीन पीपल सोसायटी के अध्यक्ष राहुल भटनागर ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि जयपुर बर्ड फेस्टिवल के संयोजक विक्रम सिंह ने गत वर्ष के फेस्टिवल और इस वर्ष की प्रमुख गतिविधियों की जानकारी साझा की। कार्यक्रम के अंत में विक्रम सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
———//——-

जयपुर बर्ड फेस्टिवल में बॉलीवुड अभिनेता राहुल सिंह ने पक्षी एवं पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

जयपुर, 1 फरवरी। बॉलीवुड फिल्मों दिल्ली बेली, कुर्बान और जॉनी गद्दार जैसी चर्चित फिल्मों में अपने सशक्त अभिनय से पहचान बनाने वाले अभिनेता राहुल सिंह ने जयपुर बर्ड फेस्टिवल में शिरकत की। फेस्टिवल के दौरान यहां आयोजित विभिन्न गतिविधियों, प्रदर्शनों और जागरूकता कार्यक्रमों को देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की।
अभिनेता राहुल सिंह ने कहा कि जयपुर बर्ड फेस्टिवल न केवल पक्षियों की विविधता को समझने का अवसर देता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में सकारात्मक चेतना भी विकसित करता है। उन्होंने विशेष रूप से विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे पक्षियों और प्रकृति के संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
उन्होंने कहा कि आज के समय में युवा पीढ़ी की भूमिका सबसे अहम है। छोटे-छोटे प्रयास, जैसे पक्षियों के लिए पानी रखना, पेड़ों का संरक्षण करना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाना, भविष्य के लिए बहुत बड़ा योगदान साबित हो सकता है।

जयपुर बर्ड फेस्टिवल में अभिनेता की उपस्थिति से विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिला।

रविवार को आर्द्रभूमियों से हुआ सीधा संवाद

सांभर–नालियासर,मेनार में परिंदों की दुनिया से रूबरू हुए पक्षीप्रेमी

जयपुर, 1 फरवरी। जयपुर बर्ड फेस्टिवल–2026 के दूसरे दिन रविवार को प्रतिभागियों ने प्रदेश की प्रमुख आर्द्रभूमियों का फील्ड विजिट कर प्रकृति और परिंदों से सीधा संवाद स्थापित किया। फेस्टिवल के अंतर्गत सांभर साल्ट लेक, नालियासर, बरखेड़ा–चंदलाई–मुहाना क्षेत्र, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर), तालछापर अभयारण्य (चूरू) और मेनार जैसे महत्वपूर्ण वेटलैंड्स में बर्ड वॉचिंग गतिविधियां आयोजित की गईं।
रविवार को आयोजित इस फील्ड विजिट में पद्मश्री सम्मानित फोटोग्राफर अनूप साह, ग्रीन पीपल सोसायटी के अध्यक्ष राहुल भटनागर, प्रतापसिंह चूंडावत, पक्षी विशेषज्ञ वीरेंद्र सिंह बेड़सा, निर्मल मेनारिया, बटरफ्लाई एक्सपर्ट मुकेश पंवार, पुष्पा खमेसरा, शरद श्रीवास्तव, बाशोबी भटनागर सहित अनेक पक्षीप्रेमी और पर्यावरणविद् शामिल हुए।

सांभर झील के मध्य तक पहुंची ‘बग्गी ट्रेन’
प्रतिभागियों ने नालियासर और सांभर साल्ट लेक का भ्रमण किया। सांभर झील के मध्य क्षेत्र तक पहुंचने के लिए छोटी ट्रेननुमा ‘बग्गी’ का उपयोग किया गया, जहां स्थानीय गाइड के अनुसार झील क्षेत्र में 20 हजार से अधिक पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई। विशाल झील में हजारों पक्षियों को एक साथ विचरण करते देख प्रतिभागी अभिभूत नजर आए।

वेटलैंड्स पर पक्षियों की अद्भुत विविधता
फील्ड विजिट के दौरान सांभर और नालियासर वेटलैंड्स पर 50 से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे गए। इनमें प्रमुख रूप से पाइड एवोसेट, नॉर्दर्न शोवलर, पिंटेल, स्पूनबिल, रेडशैंक, सैंडपाइपर, कॉमन कूट, मूरहेन, लिटिल ग्रीब, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, लिटिल रिंग्ड प्लोवर, वुड सैंडपाइपर, ग्रीन सैंडपाइपर, स्पॉट-बिल्ड डक, नॉब-बिल्ड डक, गल, फ्लेमिंगो, ग्रे हेरॉन, रिवर टर्न, किंगफिशर, गैडवाल, डार्टर, लार्ज कॉरमोरेंट, पेलिकन सहित अनेक प्रजातियां शामिल रहीं।
इसके अलावा व्हीटिअर, स्टोनचैट, येलो वैगटेल, वैगटेल, क्रेस्टेड लार्क, व्हिस्कर्ड बुलबुल, बार्न स्वैलो, वायर-टेल्ड स्वैलो, प्लोवर, इंटरमीडिएट इग्रेट, रॉक चैट, रेड कॉलर्ड डव, ग्रेटर कूकाल, ड्रोंगो, व्हाइट-बेलीड ड्रोंगो, इंडियन रोलर, ग्रेलेग गूज, बार-हेडेड गूज, रुडी शेलडक, किंगफिशर (पाइड एवं व्हाइट-थ्रोटेड), कौआ और रॉक पिजन जैसे पक्षी भी देखे गए।
संरक्षण का जीवंत संदेश
विशेषज्ञों ने बताया कि सांभर और नालियासर जैसी आर्द्रभूमियां प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आवास हैं। हजारों पक्षियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि यदि संरक्षण और संतुलित प्रबंधन किया जाए तो वेटलैंड्स जैव विविधता का मजबूत आधार बन सकते हैं।

फील्ड विजिट के दौरान प्रतिभागियों ने पक्षियों के व्यवहार, भोजन, प्रवास और आवास संबंधी विशेषताओं को नजदीक से समझा।

जयपुर बर्ड फेस्टिवल में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

रेप्टर्स, आउल और वेटलैंड्स संरक्षण पर हुआ गंभीर विमर्श

जयपुर, 1 फरवरी। ग्रीन पीपल सोसायटी, जयपुर चैप्टर द्वारा राजस्थान सरकार के वन विभाग एवं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सहयोग से आयोजित जयपुर बर्ड फेस्टिवल–2026 के तहत कानोता कैंप रिजॉर्ट, जामडोली में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रख्यात पक्षी विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की। कार्यशाला में पक्षियों—विशेषकर रेप्टर्स और आउल—के संरक्षण के साथ-साथ देश और प्रदेश की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) की चुनौतियों पर गहन विचार–विमर्श हुआ।

वेटलैंड्स पर पैनल डिस्कशन

वेटलैंड्स विषय पर आयोजित पैनल डिस्कशन को संबोधित करते हुए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ पक्षीविद् डॉ. असद रहमानी ने अमृत सरोवर योजना की जानकारी देते हुए उसमें मौजूद कुछ विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूरे देश में वेटलैंड्स संकट की स्थिति में हैं और इनके संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास आवश्यक हैं।
राजस्थान वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य एवं एनसीटीए के पूर्व सदस्य राजपाल सिंह ने वेटलैंड्स को हो रही क्षति के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अतिक्रमण, पानी की कमी और अनियमित पर्यटन गतिविधियां वेटलैंड्स के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से सांभर लेक सहित अन्य वेटलैंड्स पर पर्यटन के दुष्प्रभावों की चर्चा की और संरक्षण के लिए स्पष्ट एसओपी बनाए जाने की आवश्यकता जताई। साथ ही उन्होंने उदयपुर के मेनार, किशन करेरी और बड़वई क्षेत्रों में ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयासों की सराहना की।

समाज में सकारात्मक बदलाव की जरूरत :

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सीईओ रवि सिंह ने जयपुर बर्ड फेस्टिवल के सफल आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज में पॉजिटिव चेंज लाने की जरूरत है और बर्ड फेस्टिवल जैसे आयोजन इस दिशा में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने पर्यावरण और संरक्षण विषयों पर छोटे–छोटे प्रबुद्ध समूहों के संवाद को समय की आवश्यकता बताया।

सांभर लेक और पर्यटन प्रबंधन पर जोर

चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन (केसीए) अरुण प्रसाद ने सांभर लेक के संदर्भ में बताया कि वहां वन विभाग का कोई प्रत्यक्ष क्षेत्र नहीं है, लेकिन पक्षियों की उपस्थिति के कारण यह विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का केंद्र बनता है। उन्होंने बीते वर्षों में बर्ड फ्लू की स्थितियों में किए गए संरक्षण प्रयासों की जानकारी दी और पर्यटन प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया।

पुस्तक का विमोचन :

कार्यशाला के दौरान रेप्टर्स एक्सपर्ट रातुल शाह की पुस्तक “Falcons of India” का विमोचन किया गया। अपने प्रेजेंटेशन में शाह ने बताया कि भारत में रेप्टर्स की कुल 108 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 60 से अधिक प्रजातियां राजस्थान में मौजूद हैं। उन्होंने रेप्टर्स की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए इनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

आउल पर वैज्ञानिक जानकारी:

आउल एक्सपर्ट डॉ. प्राची मेहता ने उल्लुओं पर आधारित प्रस्तुति देते हुए बताया कि विश्व में आउल की 240 प्रजातियां, जबकि भारत में 36 प्रजातियां पाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि आउल अंटार्कटिका को छोड़कर लगभग सभी महाद्वीपों में पाए जाते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अधिकांश प्रजातियों में मादा आउल का आकार नर से बड़ा होता है। अपने व्याख्यान में उन्होंने उल्लुओं की जीवन शैली, व्यवहार और पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

फोटोग्राफी से संरक्षण का संदेश :
नैनीताल से आए पद्मश्री सम्मानित फोटोग्राफर अनूप शाह ने बर्ड्स एवं पर्यावरण फोटोग्राफी के व्यावहारिक टिप्स साझा किए। उन्होंने अपने दीर्घकालिक अनुभवों के माध्यम से बताया कि फोटोग्राफी किस प्रकार संरक्षण का सशक्त माध्यम बन सकती है।

कार्यशाला का संचालन वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. सतीश शर्मा ने किया। समापन सत्र के प्रारंभ में ग्रीन पीपल सोसायटी के अध्यक्ष राहुल भटनागर ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि जयपुर बर्ड फेस्टिवल के संयोजक विक्रम सिंह ने गत वर्ष के फेस्टिवल और इस वर्ष की प्रमुख गतिविधियों की जानकारी साझा की। कार्यक्रम के अंत में विक्रम सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
———//——-

जयपुर बर्ड फेस्टिवल में बॉलीवुड अभिनेता राहुल सिंह ने पक्षी एवं पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

जयपुर, 1 फरवरी। बॉलीवुड फिल्मों दिल्ली बेली, कुर्बान और जॉनी गद्दार जैसी चर्चित फिल्मों में अपने सशक्त अभिनय से पहचान बनाने वाले अभिनेता राहुल सिंह ने जयपुर बर्ड फेस्टिवल में शिरकत की। फेस्टिवल के दौरान यहां आयोजित विभिन्न गतिविधियों, प्रदर्शनों और जागरूकता कार्यक्रमों को देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की।
अभिनेता राहुल सिंह ने कहा कि जयपुर बर्ड फेस्टिवल न केवल पक्षियों की विविधता को समझने का अवसर देता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में सकारात्मक चेतना भी विकसित करता है। उन्होंने विशेष रूप से विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे पक्षियों और प्रकृति के संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
उन्होंने कहा कि आज के समय में युवा पीढ़ी की भूमिका सबसे अहम है। छोटे-छोटे प्रयास, जैसे पक्षियों के लिए पानी रखना, पेड़ों का संरक्षण करना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाना, भविष्य के लिए बहुत बड़ा योगदान साबित हो सकता है।

जयपुर बर्ड फेस्टिवल में अभिनेता की उपस्थिति से विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिला।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!