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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह में ”केशव जयतु“ नाटक ने डॉ. हेडगेवार के जीवन को किया जीवंत

राष्ट्र चेतना, राष्ट्र भक्ति, संगठन और समरसता का अद्भूत संगम-केशव जयतु नाटिका

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संस्थापक डॉ केशव के जीवन पर आधारित एक प्रेरणादायी नाट्य-अनुभूति

फतहनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे शताब्दी वर्ष समारोह की शृंखला में फतहनगर के केआरजी गार्डन स्थित सभागार में केशवः जयतु नामक ऐतिहासिक नाटक का प्रेरणादायक मंचन किया गया। यह नाटक संघ के संस्थापक, परम पूज्य डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और राष्ट्र के लिए उनके अतुलनीय योगदान पर केंद्रित था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महंत शिवशंकरदास महाराज थे जबकि खंड संघचालक धनपाल सेठ एवं विभाग प्रचारक एवं कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भाग हरिशंकर का भी सानिध्य मिला। कार्यक्रम में उत्तरप्रदेश के स्वामी विष्णुदास एवं रमेशदास महाराज का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर पालिका उपाध्यक्ष नितिन सेठिया,श्रीकृष्ण महावीर गौ शाला के अध्यक्ष कैलाशचन्द्र अग्रवाल आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।

डॉ. हेडगेवार के जीवन दर्शन का सजीव चित्रणः

‘केशव जयतु नाटक ने डॉ. हेडगेवार के राष्ट्र समर्पित जीवन के विभिन्न पड़ावों को अत्यंत कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक में डॉ. हेडगेवार के बचपन में देशप्रेम के संस्कारों, एक क्रांतिकारी के रूप में उनकी सक्रियता, स्वतंत्रता आंदोलन में जेल यात्रा, और अंततः 1925 में संघ की स्थापना के दूरदर्शी निर्णय को दर्शाया गया। यह प्रस्तुति दर्शकों को उनके त्याग, तपस्या और निस्वार्थ राष्ट्र सेवा के भाव से जोड़ती है।

नाटक में डॉ. हेडगेवार के मन में राष्ट्रभक्ति के बीजारोपण, उनके क्रांतिकारी विचारों, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सक्रिय भूमिका और एक संगठित एवं शक्तिशाली हिंदू समाज की आवश्यकता महसूस कर संघ की स्थापना के पीछे के दूरदर्शी दर्शन को दर्शाया गया।

युवतरंग नाट्य दल नाथद्वारा के कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से डॉ. हेडगेवार और उनके समकालीन सहयोगियों के चरित्रों को जीवंत कर दिया। विशेष रूप से मुख्य भूमिका निभाने वाले कलाकार ने संस्थापक के त्याग, तपस्या और निस्वार्थ राष्ट्रप्रेम को अत्यंत मार्मिक ढंग से व्यक्त किया। साथ ही मंच सज्जा, वेशभूषा और प्रकाश व्यवस्था को 20वीं सदी के प्रारंभ के परिवेश के अनुरूप तैयार किया गया था, जिसने दर्शकों को उस ऐतिहासिक कालखंड में ले जाने का सफल प्रयास किया।

इस अवसर पर फतेहनगर और आस-पास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के शुभारंभ में मुख्य अतिथि महंत शिवशंकर दास महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा, यह नाटक केवल एक कलाकृति नहीं है, बल्कि यह डॉ. हेडगेवार के राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत और प्रत्येक स्वयंसेवक के लिए समर्पण का प्रेरणा स्रोत है। संघ के शताब्दी वर्ष में इस नाटक का मंचन युवाओं को संगठित शक्ति और चारित्रिक बल का महत्व सिखाता है।

हिन्दू समाज का संगठन ही सभी समस्याओं का समाधानःहरिशंकर

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं राजसमंद विभाग प्रचारक हरिशंकर ने बताया कि केशव जयतु नाटक यह स्पष्ट करता है कि हिंदू समाज का संगठन किसी व्यक्ति विशेष के लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के पुनर्निर्माण और उसकी सुरक्षा का एक अनिवार्य साधन है। यह संगठन ही वह शक्ति है जो देश के सामने आने वाली सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान कर सकती है। यह नाटक एक शैक्षणिक माध्यम है जो बताता है कि समर्पित नेतृत्व, निरंतर प्रयास और समरसता के बल पर ही एक विशाल समाज को सफलतापूर्वक संगठित किया जा सकता है।

राष्ट्र की उन्नति और समाज की समस्याओं का समाधान केवल तभी संभव है जब हिन्दू समाज संगठित, जाग्रत और सशक्त हो। उनके अनुसार समाज के संगठित होने का अर्थ केवल संख्या बल नहीं है, बल्कि जात-पात और अन्य भेदों को मिटाकर एकजुटता और समरसता स्थापित करना है। यह एकता ही समाज को हर संकट का सामना करने की शक्ति देती है।

“केशव जयतु” का लेखन, परिकल्पना एवं निर्देशन दीपक भारद्वाज द्वारा की गई और इसका मंचन युवतरंग नाट्य दल नाथद्वारा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार शुभम अग्रवाल द्वारा किया गया। केशवः जयतु के इस सफल मंचन ने फतेहनगर में सांस्कृतिक और वैचारिक चेतना का संचार किया। दर्शकों ने नाटक की प्रस्तुति, संदेश की स्पष्टता और कलात्मकता की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। यह आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह को और अधिक स्मरणीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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