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स्वयं को भ्रष्ट आचरण से बचाइये।

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भीम। बहुत जल्दी फिसल जाने की अपनी आदत को बदलना पडेगा। यही कारण है कि हम जीवन में सोचते तो बहुत है अच्छा करने का और बहुत बच जाने को किन्तु तुच्छ प्रलोभन सामने आकर खडे हो जाते है और अपने निश्चयों से फिसल जाया करते है फलतः मन के मनसूबे मन में ही धरे रह जाते है।
उक्त विचार श्रमण संघीय महामंत्री श्री सौभाग्य मुनि जी ‘‘कुमुद’’ ने धर्म सभा को समबेधित करते हुए व्यक्त किये।
उन्होने कहा कि ढृढता एक आत्म शक्ति है किन्तु आज हम इस आत्म शक्ति को भूलते जा रहे है। समझौतावाद बुरा नही किन्तु समझौता समान मूल्यो के बीच ही हो सकता है। अफीम और कस्तूरी के बीच क्या समझौता हो सकता है भले ही दोनो कृष्ण वर्णीय है किन्तु एक जहर है और एक अमृत है दोनो के मध्य कैसे समझौता हो सकता है।
मुनि श्री ने बताया कि हम किसी आदर्श को या अच्छी बात को खोकर कैसे समझौता कर सकते हैं
कही न कही तो व्यक्ति को सुढृढ और स्थिर रहना पडेगा। यदि हम गलत के साथ समझौैता करने लगे तो याद रक्खे आप स्वयं गलत हो जायेंगे।
सभा को कोमल मुनि, धीरज मुनि, संभव मुनि ने भी सम्बोधित किया । सभा का संचालन संघ मंत्री भीकम चन्द ने किया।

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