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रूपमुनि की देह पंचतत्व में हुई विलीन,देशभर से हजारों श्रद्धालु उमड़े,

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करोड़ों की लगी बोलियां
फतहनगर। श्रमण संघ के व.प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री रूपमुनि रजत की ेह रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गयी। अंतिम यात्रा से पूर्व सुबह तक हजारों की तादाद में जैन व अजैन लोग जैतारण पहुंच गए तथा गुरूदेवश्री के दर्शन किए। अंतिम यात्रा में उमड़ा जन सैलाब गुरूदेव की यात्रा को एतिहासिक बना गया। गुरूदेव की मुखाग्नि से लेकर अंतिम किया तक की लगी बोलियां करोड़ों में गयी। लोगों में श्रद्धा का ज्वार देखते ही बनता था। जैतारण की सड़कों पर रूपमुनि के नाम की ही गूंज होती रही। गुरूदेव श्री की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए जैन कॉन्फ्रेंस राजस्थान प्रान्त के अध्यक्ष नेमीचंद धाकड़,महामंत्री बलवन्तसिंह हिंगड़,कोषाध्यक्ष लोकेश धाकड़,नरेश लोढ़ा,युवा शाखा राजस्थान के अध्यक्ष फतहनगर निवासी नीतिन सेठिया,राजमल बोहरा,गोपाल सहलोत,ओम समदर्शी,अनिल बम्ब आदि भी पहुंचे तथा गुरूदेव को श्रद्धासुमन अपित किए।

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इधर रूपमुनि के देवलोकगमन पर मुख्यमंत्री वसुन्धराराजे ने भी रूपमुनि महाराज के महाप्रयाण पर दुःख जताया। श्रीमती राजे ने अपने संवेदना संदेश में कहा कि श्रद्धेय रूपमुनि जी महाराज ने भगवान महावीर के सत्य और अहिंसा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। उन्होंने कई अस्पतालों और धर्मशालाओं का निर्माण करवाया। सामाजिक बुराइयों और कुरीतियों को दूर करने में अग्रणी भूमिका निभाने के कारण उन्हें न केवल जैन समाज बल्कि सम्पूर्ण समाज में अपार श्रद्धा भाव के साथ देखा जाता है। गोसेवा के प्रति उनकी निष्ठा दूसरों के लिए अनुकरणीय है। उनके महाप्रयाण से समाज ने एक ओजस्वी संत खो दिया है। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से श्री रूपमुनि जी महाराज की आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त श्रद्धालुओं को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना की।

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