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परमार्थ करने से परमात्मा पाते हैं

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फतहनगर। सिद्ध हनुमान मंदिर प्रांगण में चल रहे ९०0 दिवसीय चातुर्मास एवं अखंड सीताराम जप आयोजन में गुरूवार को नियमित प्रवचन माला के तहत नेपाली बाबा ने कहा की सभी पुस्तकीय ज्ञान पर ध्यान देते हैं, पर आचार विचार पर ध्यान नहीं देते हैं। मानव शरीर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि थोड़ा सा भी पाप करने पर पाप रूपी बीज वृक्ष का रूप ले लेता है तथा लेशमात्र भी धर्म करने पर वह पाप को समाप्त कर देता है। जैसे अग्नि अपने में आने वाली वस्तु को खत्म करती है वैसे ही तीर्थ की यात्रा से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं। परमात्मा का निवास मृत्यु लोक में है। मानव इसी लोक में धर्म का संघर्ष कर सकता है। जो परम सम्पति का संग्रह कर ले उसी को परमार्थ कहते हैं। इस परमार्थ रूपी संपत्ति को प्राप्त करने के बाद किसी संपत्ति की आवश्यकता नहीं होगी।

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